प्रयागराज

इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश: बरेली में घर के भीतर नमाज अदा करने के लिए भीड़ जुटाना पर रोक

Allahabad High Court: ईलाहाबाद हाई कोर्ट ने घर के अंदर नमाज पढ़ने को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। जिसमें उन्होंने बताया कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन कानूनी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।

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फोटो सोर्स- ChatGPT

Bareilly High Court issues major decision on offering namaz indoors: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने घर के भीतर नमाज पढ़े जाने को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। अपने निर्णय में हाई कोर्ट ने कहा है कि नमाज के नाम पर घर में भीड़ जुटाने से यदि इलाके में शांति व्यवस्था के लिए खतरा होता है तो बरेली प्रशासन और पुलिस कानूनन कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है। इसके साथ ही याची के वकील की तरफ से अदालत को भरोसा दिया गया कि भविष्य में याची की तरफ से विवादित जगह पर बड़ी संख्या में लोगों को नमाज के लिए इकट्ठा नहीं किया जाएगा।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नमाज को लेकर दिया बड़ा निर्णय

उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद हाई कोर्ट ने घर में नमाज पढ़ने को लेकर बड़ा निर्णय दिया है। इसके पहले जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की तरफ से अपर महाधिवक्ता ने अदालत को फोटो के साथ बताया कि याची सुरक्षा का फायदा उठाकर रोजाना 50 से 60 लोगों को नमाज पढ़ने के लिए बुला रहा है। जिससे इलाके की शांति व्यवस्था को खतरा है। दूसरी तरफ अदालत में बरेली के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को अदालत की तरफ से जारी किए गए अवमानना नोटिस को भी निरस्त कर दिया गया। ‌

घर के अंदर नमाज पढ़ने को डाली गई थी याचिका

उत्तर प्रदेश के बरेली में घर के अंदर नमाज पढ़ने को लेकर विवाद हो गया था। इस संबंध में इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी। जिसका निस्तारण करते हुए अदालत ने कहा कि याची अंडरटेकिंग का उल्लंघन करते हुए दोबारा भीड़ इकट्ठा करता है और इससे इलाके की शांति व्यवस्था को खतरा पैदा होता है तो बरेली जिला और पुलिस प्रशासन कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई करने को स्वतंत्र है।

डीएम और एसपी की तरफ से दाखिल हलफनामा पर कोर्ट खुश

कोर्ट ने डीएम और एसपी की तरफ से दाखिल हलफनामा में पर संतोष जताया है।‌ महाधिवक्ता ने अदालत में फोटो के साथ अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि याची मिली सुरक्षा का फायदा उठाकर 50 से 60 लोगों को नमाज पढ़ने के लिए इकट्ठा कर लेता है। इससे इलाके की शांत व्यवस्था को खतरा हो सकता है।

प्रशासन की तरफ से एडिशनल एडवोकेट जनरल ने दिया

एडिशनल एडवोकेट जनरल हलकनेम के साथ अदालत में फोटो भी प्रस्तुत की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि यदि घर के अंदर भीड़ के बीच नमाज पढ़ने की अनुमति दी जाती है तो यह क्षेत्र की शांति और सौहार्द के लिए खतरा है। व्यक्तिगत सुरक्षा के नाम पर या अनुमति नहीं दी जा सकती है। जिला और पुलिस प्रशासन को अधिकार है कि वह कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए कार्रवाई करें।

याची की तरफ से आश्वासन दिया गया कि

याची के वकील ने प्रशासन की तरफ से हलफनामे में उठाए गए मुद्दों पर कहा कि याची भविष्य में विवादित जगह पर नमाज पढ़ने के लिए भीड़ कोई इकट्ठा नहीं करेगा। इसके बदले कोर्ट ने याची के साथ अन्य लोगों के खिलाफ जारी की गये चालान को तत्काल वापस के लेने के निर्देश दिया। इसके साथ ही याची को अदालत से सुरक्षा मिली थी, जिस पर याचिका कहना था कि अब उसे इसकी जरूरत नहीं है। इस पर हाई कोर्ट ने सुरक्षा व्यवस्था वापस लेने के आदेश दिए।

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