प्रयागराज

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े केस से हाईकोर्ट जज ने खुद कर लिया अलग! मामले में बड़ा अपडेट आया सामने

Shankaracharya Avimukteshwaranand Latest News: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े केस से बड़ा अपडेट सामने आया है। हाईकोर्ट जज ने खुद को मामले की सुनवाई से अलग कर लिया है।

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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े केस से बड़ा अपडेट फोटो सोर्स- IANS

Shankaracharya Avimukteshwaranand Latest News: इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद (Avimukteshwaranand Saraswati) से जुड़े चर्चित मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल (Rohit Ranjan Agarwal) ने खुद को इस केस की सुनवाई से अलग कर लिया है। उन्होंने मामले को मुख्य न्यायाधीश के पास भेजते हुए अनुरोध किया कि इसकी सुनवाई किसी दूसरी बेंच से कराई जाए।

यह मामला अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ दर्ज पॉक्सो और अवमानना से जुड़े आरोपों को लेकर काफी चर्चा में है।

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आशुतोष महाराज ने लगाया अवमानना का आरोप

इस पूरे विवाद की शुरुआत जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष महाराज (Ashutosh Maharaj) की शिकायत से हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत शर्तों का पालन नहीं कर रहे हैं। याचिका में कहा गया कि दोनों आरोपी पॉक्सो मामले में अदालत के निर्देशों की अनदेखी कर रहे हैं और लगातार सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होकर न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।

जमानत शर्तों के उल्लंघन का आरोप

याचिका के अनुसार, अविमुक्तेश्वरानंद और मुकुंदानंद ब्रह्मचारी पर नाबालिगों के यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप हैं। हाईकोर्ट ने 27 फरवरी और 25 मार्च 2026 को मामले में कुछ विशेष शर्तों के साथ राहत दी थी।

आरोप लगाया गया कि इसके बावजूद दोनों आरोपी नाबालिग पीड़ितों के गृह जिलों में सार्वजनिक सभाएं और रैलियां कर रहे हैं। इससे न केवल जमानत की शर्तों का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि मामले की निष्पक्ष सुनवाई भी प्रभावित हो सकती है।

पीड़ित परिवारों को डराने का आरोप

आशुतोष महाराज ने अपनी याचिका में यह भी दावा किया कि सार्वजनिक मंचों, सोशल मीडिया पोस्ट और भड़काऊ बयानों के जरिए नाबालिग पीड़ितों और उनके परिवारों को डराने-धमकाने का प्रयास किया जा रहा है। याचिका में कहा गया कि इस तरह की गतिविधियों से पीड़ित परिवारों में असुरक्षा का माहौल पैदा हो गया है और वे न्यायिक प्रक्रिया को लेकर दबाव महसूस कर रहे हैं।

जान से मारने की धमकी का भी दावा

मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। आशुतोष महाराज ने दावा किया कि उनकी नाक काटने के लिए 21 लाख रुपये के इनाम की सार्वजनिक घोषणा की गई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 8 मार्च 2026 को चलती ट्रेन में उन पर जानलेवा हमला किया गया। इसके अलावा उन्हें पाकिस्तानी मोबाइल नंबर से व्हाट्सएप कॉल के जरिए धमकी दी गई। कॉल करने वालों ने कथित तौर पर कहा कि यदि केस वापस नहीं लिया गया तो उन्हें और उनके वकील को बम धमाके में मार दिया जाएगा।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

पूरा मामला प्रयागराज में आयोजित माघ मेला 2026 और महाकुंभ 2025 से जुड़ा बताया जा रहा है। 18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या के दौरान शंकराचार्य और प्रशासन के बीच विवाद हुआ था। इसके कुछ दिनों बाद 24 जनवरी को आशुतोष महाराज ने पुलिस कमिश्नर को शिकायत देकर बच्चों के यौन शोषण के आरोप लगाए। पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने 8 फरवरी को स्पेशल पॉक्सो कोर्ट का रुख किया।

पॉक्सो कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई FIR

स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में दो बच्चों को पेश किया गया, जिनके बयान दर्ज किए गए। इसके बाद 21 फरवरी 2026 को कोर्ट के आदेश पर झूंसी ( Jhunsi) थाने में FIR दर्ज की गई। FIR में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और दो-तीन अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया था।

अब आगे क्या?

अब जबकि हाईकोर्ट के जज ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया है, मामला नई बेंच को सौंपे जाने की संभावना है। इस हाईप्रोफाइल केस पर पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है, क्योंकि इसमें धार्मिक, कानूनी और राजनीतिक तीनों पहलू जुड़े हुए हैं।

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