प्रयागराज

मेरठ के सामाजिक कार्यकर्ता लोकेश खुराना व याची विपिन कुमार को नोटिस

मेरठ के रहने वाले दोनों लोगों से कोर्ट ने स्पष्टीकरण मांगा है कि क्यों न उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना कार्यवाही की जाए।
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Updated: 9 Oct 2018, 10:54 PM IST
allahabad High court
इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गलत व गुमराह करने वाला हलफनामा दाखिल करने पर जनहित याचिका दाखिल करने वाले विपिन कुमार व पैरोकार सामाजिक कार्यकर्ता लोकेश खुराना को नोटिस जारी की है। मेरठ के रहने वाले दोनों लोगों से कोर्ट ने स्पष्टीकरण मांगा है कि क्यों न उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना कार्यवाही की जाए।

कोर्ट ने दो अधिवक्ताओं जय बहादुर सिंह व सी.बी.गुप्ता पर नगर निगम मेरठ द्वारा लगाये गये आरोपों का स्पष्टीकरण मांगा है ताकि आगे की कार्यवाही की जा सके। इन वकीलों को नगर निगम ने आबद्ध नहीं किया था और इनके बयान के आधार पर कोर्ट ने याचिका निर्देश के साथ निस्तारित कर दी थी। 14 सितम्बर 17 को पारित इस आदेश को नगर निगम ने वापस लेने व कोर्ट को गुमराह करने के मामले में अर्जी दाखिल की थी जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने 14 सितम्बर के आदेश को रद्द कर दिया और जनहित याचिका पुनर्बहाल करते हुए 30 अक्टूबर को पेश करने का निर्देश दिया है।


यह आदेश मुख्य न्यायाधीश डी.बी.भोसले तथा न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खण्डपीठ ने मेरठ के विपिन कुमार की जनहित याचिका पर दिया है। निगम ने याची व वकीलों पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 340 के तहत आपराधिक कार्यवाही किये जाने की भी मांग में अर्जी दाखिल की है।

निगम का कहना है कि डम्पिंग यार्ड के बगल याची के लड़के ने दो प्लाट खरीदे उसकी ज्वैलरी शाॅप है। मेसर्स मीनाक्षी ज्वैलर्स सर्राफा बााजर मेरठ के नाम है। लोकेश खुराना व याची की मिलीभगत से डम्पिंग यार्ड को शिफ्ट करने व कूड़े को हटाने की मांग में याचिका दाखिल की गयी। दोनों वकीलों ने निगम की तरफ से शीघ्र कार्यवाही का आश्वासन दिया और याचिका निस्तारित हो गयी।

निगम ने आदेश वापसी अर्जी में आरोप लगाया कि मंगतपुरम ट्रैचिंग साइट पर 9.65 एकड़ जमीन में 40 साल से बायो कैपिंग टेक्नोलाॅजी अपना कर स्वच्छ भारत मिशन के तहत डीपीआर तैयार हो रहा है। 80 से 110 करोड़ की लागत से संयंत्र लगाया जाना है। इस योजना को अपने स्वार्थ से रोकने के लिए जनहित याचिका दाखिल की गयी थी। निगम ने वकीलों को नोटिस के लिए अधिकृत नहीं किया है।

चकरोड में बने मकान को ध्वस्त करने के आदेश पर अमल का निर्देश

इलाहाबाद उच्च न्यायालय जौनपुर की शाहगंज तहसील के जौकाबाद गांव सभा की जमीन चकरोड पर अतिक्रमण कर बने दो मंजिला मकान को ध्वस्त करने के तहसीलदार के 2014 में पारित आदेश पर अमल करने का निर्देश दिया है। तहसीलदार ने लेखपाल की रिपोर्ट पर विपक्षी रामलौट द्वारा चकरोड पर बने मकान को ध्वस्त करने व हर्जाना जमा करने का आदेश दिया था। जिसका पालन न करने पर यह जनहित याचिका दाखिल की गयी थी।
यह आदेश न्यायमूर्ति अशोक कुमार ने जौनपुर के काशी प्रसाद की जनहित याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता कमल सिंह यादव व नवीन यादव ने बहस की। याची का कहना था कि जगपाल सिंह केस में सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक उपयोग की जमीन से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया है। जिसके तहत शिकायत की गयी। तहसीलदार ने जांच रिपोर्ट मंगाकर आदेश जारी किया। किन्तु विपक्षी के प्रभावशाली होने के चलते आदेश पर अमल नहीं हो सका। प्लाट संख्या 129 में स्थित चकरोड बन्द होने से गांव के लोगों का आवागमन बाधित हो रहा है। चकरोड पर अवैध कब्जा नहीं हटाये जाने से लोगों को परेशानी हो रही है। कोर्ट ने निर्देश के साथ याचिका निस्तारित कर दी है।

BY- Court Corrospondence

Updated on:
9 Oct 2018, 10:54 PM IST
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