प्रयागराज

हाईकोर्ट का शस्त्र लाइसेंस नहीं देने पर कड़ी टिप्पणी: तलब किया पूरे आंकड़े, अपर मुख्य सचिव गृह से मांगा जवाब

Allahabad High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शस्त्र लाइसेंस के आवेदन के निस्तारण पर अधिकारियों की भूमिका पर सख्त टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि यह भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग को जन्म देता है। ‌

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फोटो सोर्स- ChatGPT

Allahabad High Court made strong comments on the disposal process of arms license applications: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शस्त्र लाइसेंस नहीं देने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। अदालत ने अपर मुख्य सचिव गृह को इस संबंध में हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है। जिसमें कई सवालों के जवाब भी मांगे हैं और यह आदेश 75 जिलों के आंकड़ों से संबंधित है। दरअसल इस संबंध में याचिका दाखिल की गई थी। जिसमें कहा गया था कि बिना किसी ठोस कारण के शस्त्र लाइसेंस के आवेदन को लंबित रखा जा रहा है। 4 साल बाद उनके शस्त्र लाइसेंस के आवेदन को जिलाधिकारी ने खारिज कर दिया। इस मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने शस्त्र लाइसेंस देने में कड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों का अनियंत्रित विवेकाधिकार भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग को जन्म देता है।

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शस्त्र लाइसेंस के आवेदन को लंबित रखने के खिलाफ दायर की गई थी याचिका

उत्तर प्रदेश के भदोही के रहने वाले जयशंकर उर्फ बैरिस्टर ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने जिला प्रशासन और गृह विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि शस्त्र लाइसेंस के आवेदनों को बिना किसी ठोस कारण के लंबे समय तक रोक कर रखना शस्त्र नियमावली 2016 के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है।

गन कल्चर कानून के शासन को कमजोर करती है

अदालत में माना कि अपराधी छवि के लोगों और राजनीतिक महत्वाकांक्षा वाले दूसरों को डराने और अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए हथियारों का दुरुपयोग करते हैं। रील बनाकर सोशल मीडिया पर भी डाला जा रहा है, जो समाज के लिए खतरा है। अदालत ने कहा कि गन कल्चर कानून के शासन को कमजोर करती है। इससे नागरिकों के मन में भय उत्पन्न होता है।

हलफनामा में इन सवालों का मांगा जवाब

अपर मुख्य सचिव गृह को अदालत ने हलफनामा के साथ जवाब मांगा है। जिसमें पूछा गया है कि राज्य में शस्त्र लाइसेंस का कोई डाटाबेस तैयार है कि नहीं? शस्त्र नियमों के तहत अनुमोदित डाटा का डिजिटल रूप से डल सिस्टम अपडेट किया गया है कि नहीं? यूपी जैसे बड़े राज्य में मजबूत शास्त्र नीति की आवश्यकता पर भी सवाल किया। इसके साथ ही कोर्ट ने उन प्रशासनिक बाधा की जानकारी मांगी है जिसके कारण शस्त्र नियमावली के प्रावधानों का पालन समय से नहीं हो पा रहा है।

75 जिलों के आकड़े की भी मांग

अदालत ने पूछा है कि एक ही परिवार के कई सदस्यों के पास शस्त्र लाइसेंस है। इसकी न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने प्रदेश के सभी 75 जिलों के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि जिला वार और थानावार हथियारों का पूर्ण विवरण दें। उन लाइसेंस धारकों की भी सूची को तलब किया है जिनका आपराधिक इतिहास है। यह फिर जिनके विरुद्ध दो से अधिक मामले दर्ज हैं

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