Allahabad High Court: पीड़िता की मां ने फतेहपुर में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप लगाया कि दिनेश पासवान ने बच्ची को बहला- फुसलाकर अपने कमरे में ले जाकर दुष्कर्म किया। सत्र अदालत ने 18 जनवरी, 2022 को पासवान को मौत की सजा सुनाई थी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने तीन साल की बच्ची से बलात्कार और हत्या के दोषी की सजा घटा दी है। एक विवाहित व्यक्ति की मौत की सजा को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 30 साल की सजा में बदल दिया है। कोर्ट ने इस फैसले के पक्ष में कहा कि याची का न तो कोई आपराधिक इतिहास था और न ही वह पहले दोषी था, ऐसे में उसमें सुधार होने की संभावना है। इसी वजह से फांसी की सजा कम की जानी चाहिए। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस कुमार मिश्रा और जस्टिस सैयद आफताब हुसैन रिजवी की डिवीजन बेंच ने यह आदेश दिया है।
दरअसल, फतेहपुर की जिला एवं सत्र अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई थी।
अपीलकर्ता-पासवान की वकील तनीषा जहांगीर मुनीर ने दलील दी कि अपीलकर्ता को केवल संदेह के आधार पर झूठा फंसाया गया है। घटना को अभियोजन पक्ष द्वारा दबा दिया गया है। मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्य का है, जिसकी कड़ियां अधूरी हैं। घटना का स्थान तय नहीं किया गया क्योंकि मृतक का शव कथित घटना स्थल अपीलकर्ता के किराए के कमरे पर नहीं मिला था।
मृतक की मां के मुताबिक शव उसके नाना-नानी के घर पर पाया गया था। संबंधित पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा, “अपराध बहुत जघन्य प्रकृति का है और वीभत्स तरीके से किया गया है। आरोपी की उम्र 08 दिसंबर 2021 को 25 वर्ष का एक युवक था। रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों से यह भी स्थापित होता है कि आरोपी शादीशुदा है और उसका एक बच्चा भी है। अपीलकर्ता-अभियुक्त का न तो कोई आपराधिक इतिहास है और न ही वह पूर्व दोषी है .इसलिए उसके सुधार की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।”
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आपको बता दें मृत बच्ची की मां ने फतेहपुर के खागा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप लगाया कि दिनेश पासवान बच्ची को बहला- फुसलाकर अपने कमरे में ले गया। उसने जघन्य अपराध कर उसकी हत्या कर दी। सत्र अदालत ने 18 जनवरी, 2022 को पासवान को मौत की सजा सुनाई थी। इस आदेश को पासवान ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।