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Allahabad High Court Prayagraj: प्रयागराज में इलाहाबाद हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के एक न्यायमूर्ति ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की भूमिका पर सख्त टिप्पणी की है, तो दूसरे न्यायमूर्ति ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि बिना दूसरे पक्ष को सुने इस तरह की गंभीर टिप्पणी नहीं होनी चाहिए। दोनों न्यायमूर्ति के बीच इस मामले में मतभेद दिखाई पड़ा। दरअसल इलाहाबाद हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच मदरसा, मुसलमानों पर हमले, लिंचिंग और अंतरधार्मिक जोड़ों के उत्पीड़न पर आज सुनवाई कर रहा था। इस मामले में न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने एनएचआरसी को लेकर सख्त टिप्पणी की, जिस पर न्यायमूर्ति विवेक शरण ने कहा कि बिना दूसरे पक्ष को सुने इस प्रकार की गंभीर टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए थी। ऐसे में डिविजन बेंच का विभाजित फैसला सामने आया है, जिसकी अगली सुनवाई 11 मई को होगी।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के इलाहाबाद हाईकोर्ट के डिवीजन बेंच का विभाजित फैसला चर्चा का विषय बना है। मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। अदालत मदरसा की जांच और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अधिकार क्षेत्र से जुड़े प्रश्नों की सुनवाई कर रहा था।
इलाहाबाद हाई कोर्ट में मदारिस अरबिया शिक्षक संघ व अन्य याचिकाकर्ताओं की तरफ से दाखिल की गई रिट याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने 558 सहायता प्राप्त मदरसों की जांच के लिए ईओडब्ल्यू को निर्देश दिया है। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के इस निर्देश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने मानवाधिकार मामलों में आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाया। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने अपनी टिप्पणी में कहा कि एनएचआरसी अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर 558 सहायता प्राप्त मदरसे में दखल दे रहा है। मुसलमान के साथ के ऊपर हमले और लिंचिंग के मामले में आयोग ठीक से जांच नहीं करता है। भीड़ या किसी गुट की पिटाई होने के मामले में मानव अधिकार आयोग सक्रियता नहीं दिखाता है। इसी प्रकार की टिप्पणी उन्होंने अंतर अंतरधार्मिक जोड़ों के उत्पीड़न को लेकर किया है।
इस मामले में न्यायमूर्ति विवेक शरण ने कहा कि सभी पक्षों को सुने बिना इस प्रकार की व्यापक टिप्पणी करना उचित नहीं है। सुनवाई के दौरान एनएचआरसी का कोई पक्षकार मौजूद नहीं था; इसके साथ ही उन्होंने टिप्पणी की कि पक्षों की अनुपस्थिति में प्रतिकूल टिप्पणी नहीं होनी चाहिए। दोनों न्यायाधीशों के अलग-अलग मत सामने आने से डिवीजन बेंच का फैसला विभाजित माना गया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 11 मई को होगी।
Published on:
29 Apr 2026 08:06 pm
