2784 पदों पर हो रही है भर्ती, 6.50 लाख अभ्यर्थियों ने दी परीक्षा
इलाहाबाद. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दरोगा भर्ती-2016 के खिलाफ दायर कई याचिकाओं को शुक्रवार को खारिज कर दी। दरोगा के 2784 पदों पर भर्ती के लिए 12 दिसम्बर से 22 दिसम्बर 17 तक पूरे प्रदेश में विभिन्न केन्द्रों पर परीक्षा आयोजित की गयी। इस परीक्षा में साढ़े छह लाख अभ्यर्थियों ने भाग लिया है। याचिका दायर कर दो आधारों पर इस भर्ती परीक्षा को चुनौती दी गयी थी। याचिका में कहा गया था कि परीक्षा में बड़े पैमाने पर अनियमितता हुई है तथा परीक्षा का विज्ञापन नियमों के विपरीत निकाला गया है।
मुख्य स्थायी अधिवक्ता वाई.के.श्रीवास्तव ने याचिका का विरोध किया तथा कहा कि प्रतिष्ठित संस्था इस परीक्षा को करा रही है और इसमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं है। कहा गया था कि दरोगा भर्ती का विज्ञापन रूल्स में संशोधित नियमों के अनुसार ही हो रही है। न्यायमूर्ति आर.एस.आर.मौर्या ने भर्ती के खिलाफ शिवशंकर यादव समेत कई अन्य याचियों की याचिका खारिज कर दी है।
सरकारी ऑफिस में यौन उत्पीड़न मामले की सुनवाई 2 हफ्ते बाद
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी कार्यालय में यौन उत्पीड़न मामले को लेकर दाखिल जनहित याचिका को दो हफ्ते बाद पेश करने का आदेश दिया है। लॉ इंटर्न द्वारा दायर एक जनहित याचिका में कहा गया था कि इलाहाबाद के एसआरएन हास्पिटल, टी.बी.सप्रू अस्पताल समेत अन्य कई प्राइवेट नर्सिंग होम, पोस्ट आफिस, एलआईसी व अन्य विभागों में यौन उत्पीड़न मामलों की सुनवाई के लिए कोई कमेटी नहीं बनी है।
इस मामले पर हाईकोर्ट ने कहा कि यह कैसे कहा जा सकता है कि ऐसा नहीं है। कोर्ट ने लॉ छात्रों को इस संबंध में आरटीआई के जरिए सूचना हासिल कर बेहतर तथ्य प्रस्तुत करने को कहा है। आधे अधूरे तथ्य के साथ याचिका दाखिल करने पर कोर्ट ने इन विधि छात्रों की क्लास भी ली। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति डी.बी.भोसले तथा न्यायमूर्ति एम.के.गुप्ता की खण्डपीठ ने आफरीन मोहम्मद की जनहित याचिका पर दिया है। याची का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की विशाखा केस में दी गयी गाइडलाइन का पालन नहीं किया जा रहा है।