यौन संबंध बनाकर ब्लैकमेलिंग यानी हनीट्रैप के मामलों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की डिवीजन बेंच ने यूपी पुलिस को ऐसे गिरोहों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि हनीट्रैप जैसे अपराध न सिर्फ व्यक्ति बल्कि पूरे समाज के लिए गंभीर खतरा हैं। ऐसे मामलों को हल्के में नहीं लिया जा सकता और इन पर सख्त कार्रवाई जरूरी है। अगर इस तरह के मामलों पर रोक नहीं लगी तो सभ्य समाज में रहना मुश्किल हो जाएगा।
हाईकोर्ट ने पांच आरोपियों के खिलाफ दर्ज जबरन वसूली के केस को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से ही इनकार कर दिया। आरोपियों में दो पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने एक व्यक्ति को हनीट्रैप में फंसाकर उससे ब्लैकमेलिंग के जरिए पैसे वसूले। यह मामला 30 मार्च को कोर्ट के सामने पेश हुआ था, जिसकी जानकारी गुरुवार को सामने आई।
मामला बिजनौर के किरतपुर क्षेत्र का है। यहां के पीड़ित ने जनवरी में पुलिस को दी शिकायत में बताया कि एक महिला ने वॉट्सएप पर उससे संपर्क किया और धीरे-धीरे दोस्ती बढ़ाई। इसके बाद उसने उसे अपने झूठे प्रेम जाल में फंसा लिया।
महिला ने उसे शहर के एक होटल में मिलने के लिए बुलाया, जहां दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने। इसी दौरान महिला ने उसके निजी फोटो और वीडियो रिकॉर्ड कर लिए।
घटना के बाद आरोपी महिला ने पीड़ित को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उससे पैसे की मांग की गई।
आरोपियों ने पीड़ित को मोतीचूर इलाके में बुलाया, जहां पहले 10 लाख रुपये मांगे गए। बाद में सौदेबाजी कर रकम 8 लाख रुपये कर दी गई।
पीड़ित ने आरोप लगाया कि इस पूरे गैंग में एक सभासद, दो पुलिसकर्मी और अन्य लोग शामिल थे। शिकायत के आधार पर 23 जनवरी को किरतपुर थाने में तैनात दो सिपाहियों समेत 5 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया।
मामले में आरोपियों ने एफआईआर रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन 30 मार्च को कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।
इसके बाद याचिकाकर्ताओं के वकील ने याचिका वापस ले ली। कोर्ट ने आदेश दिया कि इस फैसले की जानकारी पुलिस महानिदेशक, मेरठ जोन के पुलिस महानिरीक्षक और उत्तर प्रदेश सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को भी दी जाए।
हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग के गंभीर मामलों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए मेरठ जोन के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस से पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने इसे बेहद गंभीर मामला बताते हुए कहा कि ऐसे अपराधों पर तुरंत और प्रभावी कार्रवाई जरूरी है।
कोर्ट ने प्रदेश के सभी जिलों के पुलिस प्रमुखों को भी सचेत करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय ऐसे गिरोहों पर नजर रखें और उनकी पहचान कर तत्काल कार्रवाई करें। अदालत ने कहा कि अगर कोई गिरोह महिलाओं का इस्तेमाल कर लोगों को हनीट्रैप में फंसा रहा है या किसी भी तरीके से ब्लैकमेलिंग कर रहा है, तो ऐसे नेटवर्क को तुरंत पकड़ा जाना चाहिए।