प्रयागराज

बिटिया@work : मेरी बेटियां मेरा अभिमान हैं, बेटों से किसी मामले में कम नहीं

अब वो समय नहीं रहा कि बेटे—बेटी में भेद किया जाए, घर से सरहद तक संभाल रही बेटियां
2 min read
बिटिया@work
bitiya@work

इलाहाबाद। आज का युग बदल गया है। लड़कियां हर क्षेत्र में कदम से कदम मिला रही हैं। पढ़ाई लिखाई से लेकर खेल के मैदान और सीमा की सुरक्षा से व्यापार संभालने तक हर काम में बेटियां बेटों की तरह परिवार का सहारा बन रही हैं। ऐसी ही कुछ कहानी है इलाहाबाद विश्वविद्यालय की छात्रा सौम्या केसवानी की। लेखन को अपना शौक बताने वालीं सौम्या पढ़ाई के साथ—साथ अपने पापा के साथ बर्तन की दुकान चलाने में भी सहायता करती हैं।

पत्रिका के@मेरी बेटियां मेरा अभियान के तहत सौम्या ने बताया कि खाली समय में और जरूरत के समय में वह पापा की मदद करने दूकान जाती हैं। उनका भाई छोटा है, इसलिए वे जितना संभव होता है पापा का की मदद करती हैं। सौम्या का कहना है, कि आज लड़कियां हर क्षेत्र में कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं, इसलिए सिर्फ एक काम तक सीमित रहना सही नहीं है। यही कारण है कि वे पिता के साथ दुकान संभालने का काम सीख रही हैं।

सौम्या के पिता श्यामजी केसरवानी ने बताया, की कभी उनकी बेटी ने यह महसूस नही होने दिया की बेटा छोटा है । दुकान में पूरी जिम्मेदारी निभायी, मुझे परेशान और थका देखा तो आराम करने को भेज दिया ।कहा की मैंने कभी लड़के और लड़कियों में भेद नहीं किया। उन्होंने कहा, मेरी बेटी दुकान चलाने में मेरी मदद करती है और मेरी नामौजूदगी में भी दुकान संभाल लेती है।

उन्होंने कहा, लोगों को भेद करना बंद कर देना चाहिए, क्योंकि आज लड़कियां किसी भी मामले में कम नहीं हैं, मेरी दो बेटियां हैं एक बीएड कर रही है वो भी मेरी सहायता करती है। बेटा अभी छोटा है, इसलिए दोनों बेटियां बेटों से बढ़कर मेरा साथ देती हैं, मेरी बेटियां मेरा अभिमान हैं। श्याम जी कहते हैं कि लोगों को बेटियों हर क्षेत्र में आगे बढ़ाना चाहिए। अब वो समय नहीं रहा कि बेटे—बेटी में भेद किया जाए,बेटियां घर से सरहद तक संभाल रही है ।

Published on:
28 Sept 2018 05:33 pm