प्रयागराज

इविवि के छात्रावासों में ताबड़तोड़ छापेमारी, बम बनाने की सामग्री बरामद

हाईकोर्ट की सख्ती के बाद एक्शन में पुलिस अवैध कब्जे वाले कमरों का फेंका गया सामान हत्यारोपियों पर 50हजार का इनाम घोषित करने की तैयारी
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अवैध कब्जे वाले कमरों का फेंका गया सामान
अवैध कब्जे वाले कमरों का फेंका गया सामान

प्रयागराज. इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के पीसी बनर्जी छात्रावास में पूर्व छात्र की हत्या पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। हाईकोर्ट की फटकार के बाद हरतकत में आई पुलिस ने कुछ ही घंटों में छात्रावासों में ताबड़तोड़ छापेमारी की। विवि के ताराचंद हॉस्टल में की गई छापेमारी के दौरान पुलिस को एक देसी बम और बम बनाने का सामान बरामद हुआ है। इसके साथ ही पुलिस को तलाशी के दौरान एक बंद कमरे के अंदर से नकली तमंचा भी बरामद हुआ है।

विवि प्रशासन के साथ ही पुलिस पीएसी और आरएएफ की मौजूदगी में हॉस्टल के कमरों में कई घंटे तक चली छापेमारी की कार्रवाई में एक एक कमरे की सघन तलाशी ली गई। हालांकि पुलिस की छापेमारी से पहले ही अधिकतर कमरों में ताला बंद कर दिया गया था। लेकिन पुलिस की टीम ने कमरों का ताला तोड़कर तलाशी ली। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने हॉस्टल के कमरों में लगाए गए कूलर, गैस सिलेण्डर और हीटर को निकालकर बाहर फेंक दिया।

आलाधिकारियों पर कोर्ट नाराज


एसपी सिटी का कहना है कि विवि छात्रावासों में अवैध रूप से छात्र रह रहे हैं। उन्हीं की जांच के लिए चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। तारा चंद हास्टल के 58 कमरों में भी अवैध छात्रों का कब्जा पाया गया है। इसके बाद कमरों को सील कर दिया गया है। बता दें कि दो दिन पहले विवि के पीसी बनर्जी हॉस्टल में एक पूर्व छात्र रोहित शुक्ला की गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी। इस मामले को मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया और जनहित याचिका कायम कर सुनवाई करते हुए विश्वविद्यालय के कुलसचिव को नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही प्रमुख सचिव गृह, कमिश्नर प्रयागराज, डीएम व एसएसपी प्रयागराज से भी 22 अप्रैल को कार्रवाई रिपोर्ट तलब की है। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद पुलिस और प्रशासन की टीमों ने विवि के हॉस्टल में छापेमारी की है।

छात्रों ने पुलिस पर लगाया लूट का आरोप


वहीं ताराचंद हास्टल में रह रहे छात्रों ने पुलिस पर पिटाई और लूट का आरोप लगाया है। छात्रों का आरोप है कि उनके कमरों से पर्स, लैपटॉप और मोबाइल गायब हैं। जिस तरह से पुलिस ने कमरों में तोडफ़ोड़ की है, उससे उनकी पढ़ाई पर असर पड़ेगा। छात्रों का कहना है कि हॉस्टल में रहने वाले कुछ छात्र गलत हो सकते हैं, लेकिन सभी छात्रों के साथ अपराधियों के समान व्यवहार करना कतई उचित नहीं है।

आरोपियों के कमरे सीज


रोहित शुक्ला की हत्या के आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने 25-25 हजार का इनाम घोषित किया था। इसको बढ़ा कर पुलिस ने बुधवार को 50,000 इनाम घोषित करने की संतुति दे दी है। आरोपियों की गिफ्तारी के लिए क्राइम ब्रांच की एक टीम लगाई गई है। हत्याकांड के मुख्य आरोपी आदर्श त्रिपाठी जो बाराबंकी का रहने वाला है, उसके साथ ही अन्य पांच आरोपियों की तलाश में छापेमारी की जा रही है। बुधवार की भोर में कई थानों की फोर्स ताराचंद छात्रावास से पहुंची और वहां अवैध रूप से रहने वालों के कमरों से सामान को बाहर फेंक दिए। पीसीबी छात्रावास में जहां पर अच्युतानंद और रोहित शुक्ला की हत्या हुई उसके कमरा नंबर 19 में हत्यारोपी सौरभ विश्वकर्मा रहता था।

प्रशासन खुद भी जिम्मेदार


विश्वविद्यालय में पिछले एक दशक से छात्र राजनीति पर अपराध ने अपना कब्जा जमा लिया है। हर बड़ी घटना में विवि का नाम जुड़ता जा रहा है। लेकिन यह माहौल यूं ही नहीं बना। इसके लिए पुलिस प्रशासन भी जिम्मेदार है। अराजकता फैलाने वाले छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होती है, लेकिन राजनीतिक रसूख और नेताओं के दबाव में पुलिस कार्यवाही नहीं करती है। विश्वविद्यालय में तोडफ़ोड़, हमला, रंगदारी यहां तक कि जान से मारने की धमकी जैसे मामलो में 200 से ज्यादा छात्र वांटेड हैं।

BY- प्रशून पांडेय

Updated on:
17 Apr 2019 08:04 pm
Published on:
17 Apr 2019 07:59 pm
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