प्रयागराज

दलित युवक की हत्या पर भड़के चंद्रशेखर, सोशल मीडिया पर किया ऐसी भाषा का इस्तेमाल  

Chandra Shekhar Azad on Dalit Boy Murder: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में दलित युवक की हत्या के बाद राजनितिक सरगर्मी बढ़ती ही जा रही है। अखिलेश यादव, अजय राय और मायावती के बाद अब चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ ने सरकार से अहम सवाल किए हैं। आइए बताते हैं उन्होंने क्या कहा ? 
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Updated: 15 Apr 2025, 1:08 PM IST
Chandra Shekhar Azad
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Chandra Shekhar Azad on Dalit Boy Murder in Prayagraj: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में दलित युवक की हत्या के बाद प्रदेश में राजनीति का पारा चढ़ता ही जा रहा है। समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस के बाद आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना से लोकसभा सांसद चंद्रशेखर आजाद ने सरकार पर जोरदार हमला किया है। 

चंद्रशेखर आजाद रावण ने क्या कहा ? 

लोकसभा सांसद चंद्रशेखर आजाद रावण ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘X’ पर लिखा कि उत्तर प्रदेश के जनपद प्रयागराज के थाना करछना क्षेत्र में कल, 12 अप्रैल 2025 की रात 10 बजे, जातिवादी मानसिकता से ग्रस्त कुछ गुंडे बहुजन युवक देवी शंकर को बोझा ढोने के बहाने घर से बुलाकर ले गए। आज सुबह 5:30 बजे, गांव के पूरब स्थित महुआ के बाग में उसकी जली हुई लाश मिली। यह कोई हादसा नहीं, बल्कि जातिवादी नफरत से भरे दरिंदों द्वारा की गई सुनियोजित हत्या है। आरोपियों ने पेट्रोल डालकर देवी शंकर को ज़िंदा जला दिया। 

सीएम योगी से पूछे सवाल 

चंद्रशेखर आजाद रावण ने आगे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए लिखा कि जातिवादी आतंक यहीं नहीं रुका — आज सुबह मृतक के घर पहुंचकर उसकी माँ और बहनों को गालियाँ दी गईं और धमकाया गया कि, “ ... ऐसे ही बारी-बारी से ज़िंदा जलाकर मारेंगे!” यह घटना अत्यंत दुखद और दंडनीय होने के साथ-साथ, जातिवादी हैवानियत और मृतप्राय कानून व्यवस्था का जीवंत प्रमाण है। मैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूछना चाहता हूं कि क्या दलित होना अब गुनाह है? कहां है कानून? कहां है संविधान? क्या प्रशासन इस नरसंहार की खुली चुनौती को स्वीकार करेगा या मौन रहेगा?

सरकार से की ये मांग 

चंद्रशेखर आजाद ने अपने पोस्ट में सरकार से मांग कि और लिखा कि मैं उत्तर प्रदेश सरकार से मांग करता हूं  कि  सभी हत्यारों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए। हत्या, षड्यंत्र और SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम की कठोरतम धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए। फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई हो। पीड़ित परिवार को सरकारी सुरक्षा, समुचित मुआवज़ा व एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए और पूरे गांव में भय का माहौल समाप्त कर, दलितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

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