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मौत से पहले अतीक को सताता था एक ही डर, कैमरे पर चीख-चीख कर लगाता था गुहार

अतीक अहमद कभी पूर्वांचल का सबसे बड़ा माफिया था, जिसका नाम सुनते ही लोग डर जाते थे। छोटे अपराध से शुरू होकर उसने बड़ा साम्राज्य खड़ा किया।

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अतीक अहमद की आखिरी गुहार

अतीक अहमद की आखिरी गुहार Source- Patrika

Prayagraj Mafia Atiq Ahmed Story: अतीक अहमद एक समय उत्तर प्रदेश में आतंक का दूसरा नाम था। पूर्वांचल के गलियारों में उसका नाम सुनते ही लोग काँप जाते थे। प्रयागराज, बांदा, फतेहपुर और आसपास के इलाकों में उसका माफिया साम्राज्य फैला हुआ था। लेकिन मौत के समय वही अतीक कैमरे के सामने चीख-चीखकर गुहार लगा रहा था। उसने कहा था कि माफियागिरी खत्म हो चुकी है। हमारा परिवार मिट्टी में मिल चुका है। अब तो मिट्टी में मिलने के बाद रगड़े जा रहे हैं। मैं सरकार से कहना चाहूंगा कि अब मेरे घर की औरतों और बच्चों को परेशान न करें। ये शब्द उस शख्स के थे जो कभी एक फोन कॉल से किसी का नामो-निशान मिटा देता था। कोई सवाल नहीं, कोई गवाह नहीं। बस एक इशारा और काम हो जाता था।

छोटे अपराध से माफिया बनने तक

अतीक अहमद का जन्म 1962 में प्रयागराज के एक गरीब परिवार में हुआ था। पिता टांगेवाले का काम करते थे। स्कूल छोड़ने के बाद अतीक छोटे-मोटे अपराधों में शामिल हो गया। 1979 में पहली हत्या का केस उसके नाम दर्ज हुआ। धीरे-धीरे उसने अपराध की दुनिया में जगह बनाई। 90 के दशक में उसका बड़ा प्रतिद्वंद्वी शौकत इलाही एनकाउंटर में मारा गया। इसके बाद अतीक का जलवा बढ़ गया। उसने एक्सटॉर्शन, किडनैपिंग, लैंड माफिया और हत्याओं का नेटवर्क खड़ा कर लिया। प्रयागराज से लेकर आसपास के जिलों तक उसका आतंक फैल गया। लोग कहते थे कि अतीक का एक फोन कॉल काफी था। कोई भी विरोध करने वाला गायब हो जाता था। अतीक ने राजनीति में भी कदम रखा। वह विधायक बना और बाद में सांसद भी चुना गया। जेल में रहते हुए भी चुनाव लड़ता था। उसके खिलाफ 100 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज थे। पुलिस ने उसके परिवार की करोड़ों की संपत्ति जब्त की। बुलडोजर चलाकर अवैध मकान गिराए गए।

माफिया साम्राज्य का डर

पूर्वांचल में अतीक का नाम सुनकर व्यापारी, नेता और आम लोग डर जाते थे। उसका गैंग इतना मजबूत था कि कोई उसके खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं करता था। गवाह गायब हो जाते या मुकर जाते थे। राजू पाल हत्याकांड जैसे कई बड़े केस उससे जुड़े थे। उमेश पाल जैसे गवाह को भी नहीं बख्शा गया। अतीक का साम्राज्य सिर्फ अपराध तक सीमित नहीं था। उसने लैंड डीलिंग, निर्माण और दूसरे अवैध कारोबारों से अरबों की संपत्ति बनाई। लेकिन ये सब एक दिन खत्म होने वाला था।

मौत का डर और परिवार की चिंता

2023 में अतीक का बेटा असद एनकाउंटर में मारा गया। फिर 15 अप्रैल 2023 को अतीक और उसके भाई अशरफ को प्रयागराज में मेडिकल के लिए ले जाया जा रहा था। पुलिस की मौजूदगी में मीडिया से बात करते समय तीन हमलावरों ने उन पर गोलियां चला दीं। पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई। मौत से कुछ पल पहले अतीक ने आखिरी अपील की। उसने कहा कि अब माफियागिरी खत्म हो चुकी है। परिवार मिट्टी में मिल गया है। सरकार से गुहार लगाई कि औरतों और बच्चों को अब परेशान न किया जाए। उसके शब्दों में डर साफ झलकता था। जो शख्स कभी दूसरों को डराता था, आज खुद परिवार की चिंता में था। उसका भाई अशरफ भी कुछ बोल रहा था, लेकिन गोलीबारी शुरू हो गई। अतीक और अशरफ दोनों मौके पर ही मारे गए।

परिवार का क्या हुआ?

अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन, कुछ बेटे और परिवार की अन्य महिलाएं फरार हो गईं या केस में शामिल हैं। कुछ बेटे जेल में हैं। एक बेटा पहले ही एनकाउंटर में मारा जा चुका था। पुलिस ने परिवार की कई संपत्तियां जब्त कीं। घरों पर बुलडोजर चला। अतीक की मौत के बाद उत्तर प्रदेश में माफिया पर सख्त कार्रवाई हुई। कई बड़े गैंगस्टरों के खिलाफ अभियान चला। लोग कहते हैं कि अब पूर्वांचल में वैसा आतंक नहीं रहा। लेकिन अतीक की कहानी आज भी याद की जाती है।

सबक क्या है?

अतीक की जिंदगी दिखाती है कि अपराध और राजनीति का मेल कितना खतरनाक होता है। शुरू में छोटे अपराध से शुरू करके कोई भी बड़ा माफिया बन सकता है। लेकिन अंत में सब मिट्टी में मिल जाता है। परिवार, पैसे और पावर, सब पीछे छूट जाता है। अतीक की आखिरी गुहार परिवार के लिए थी। मौत के समय भी उसे अपनी औरतों और बच्चों की चिंता सता रही थी।

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