
अतीक-अशरफ हत्याकांड के तीन साल। फोटो सोर्स- पत्रिका न्यूज
Three Years Atiq Ashraf Massacre: प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद (Atiq Ahmed) और उसके भाई अशरफ (Ashraf) (खालिद अजीम उर्फ अशरफ) की 15 अप्रैल 2023 को हुई हत्या के 3 साल पूरे हो चुके हैं। बावजूद इसके, शहर में उनके नाम का खौफ पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। स्थानीय लोगों और व्यापारियों के बीच आज भी उनके गैंग की सक्रियता को लेकर भय का माहौल बना हुआ है।
हत्या के इतने समय बाद भी अतीक की पत्नी शाइस्ता (Shaista Parveen) और अशरफ की पत्नी जैनब (Zainab) का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। पुलिस को कई बार उनकी लोकेशन मिलने के दावे हुए, लेकिन दोनों को अब तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। शाइस्ता पर 50 हजार रुपये और जैनब व आयशा नूरी पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित है।
अतीक के मारे जाने के बाद भी उसका गैंग पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। गैंग के पुराने सदस्य और करीबी आज भी जमीन कब्जाने, रंगदारी मांगने और हिंसक वारदातों को अंजाम देने में सक्रिय बताए जा रहे हैं। इससे यह साफ है कि गैंग का नेटवर्क अभी भी मजबूत बना हुआ है। हाल ही में ऐसे मामले देखने को भी मिले हैं।
करेली के ऐनुद्दीनपुर में हाल ही में एक प्रॉपर्टी डीलर की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई, जिसमें अतीक के पुराने गुर्गों का नाम सामने आया है। इससे पहले भी एक जमीन कारोबारी को कार में रोककर पीटा गया था। नवंबर 2025 में बिल्डर डॉ. जीशानुल हक के अपहरण की कोशिश और रंगदारी न देने पर हमले के आरोप भी इसी गैंग से जुड़े बताए गए थे।
बमरौली क्षेत्र में एटीएस और चुनाव कार्यालय के लिए चिन्हित सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का मामला भी सामने आ चुका है। चार विभागों की SIT जांच में गैंग के आर्थिक अपराधों और जमीन कब्जाने के नेटवर्क की पुष्टि हुई थी, जिससे यह संकेत मिलता है कि अपराध का दायरा काफी बड़ा है।
हाल ही में रिलीज फिल्म धुरंधर पार्ट 2 के बाद अतीक अहमद के कथित पाकिस्तान कनेक्शन की चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं। फिल्म में आतंकी संगठनों से हथियार मंगाने, नकली नोटों के नेटवर्क और जेल से अपराध संचालन जैसे पहलुओं को दिखाया गया है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन खुफिया एजेंसियां पहले भी इस एंगल पर जांच कर चुकी हैं।
अधिवक्ता उमेश पाल हत्याकांड के आरोपी गुड्डू मुस्लिम, अरमान और साबिर अब भी फरार हैं। इन पर पांच-पांच लाख रुपये का इनाम घोषित है। गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई, गैर-जमानती वारंट और कुर्की की नोटिस जारी होने के बावजूद ये आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं और उन्होंने कोर्ट में आत्मसमर्पण भी नहीं किया है।
3 साल बाद भी गैंग के सक्रिय रहने और मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी ना होने से कानून व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोग सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ताकि इस तरह के संगठित अपराध पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।
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Updated on:
15 Apr 2026 01:12 pm
Published on:
15 Apr 2026 01:11 pm
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