प्रयागराज

खराब भोजन का मुद्दा उठाने वाले कांस्टेबल मनोज कुमार पहुंचे इलाहाबाद हाईकोर्ट, उठाई ये मांग

कांस्टेबल मनोज कुमार ने पुलिस मेस में खराब भोजन परोसे जाने का मुद्दा उठाया था। उनका वीडियो भी वायरल हो हुआ था।
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फिरोजाबाद पुलिस लाइन स्टाफ मेस में घटिया भोजन पर वीडियो बनाने वाले मनोज कुमार ने अपने तबादले के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया है। 26 वर्षीय यूपी पुलिस कांस्टेबल मनोज का तबादला फिरोजाबाद से 600 किलोमीटर दूर गाजीपुर जिले में दिया गया था।

उन्होंने तबादले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। मंगलवार को उनकी याचिका पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और यूपी पुलिस से जवाब मांगा है। दोनों को मामले में पार्टी बनाया गया था और चार सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया था।

कांस्टेबल मनोज कुमार ने लगाया ये आरोप
कांस्टेबल मनोज ने आरोप लगाया है कि पुलिसकर्मियों को घटिया भोजन परोसे जाने का मुद्दा उठाने की सजा उन्हें तबादले के तौर पर दी गई है। हालांकि डीजीपी कार्यालय की तरफ से 20 सितंबर को जारी आदेश में तबादले का कोई कारण नहीं बताया गया है।

मनोज ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से अलीगढ़ में इतनी दूर उनका ट्रांसफर करने वाले आदेश को रद्द करने की अपील की थी। उन्होंने ने अपने माता-पिता की खराब स्वास्थ्य स्थिति का हवाला भी दिया था। हालांकि उनकी अपील पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

2018 में यूपी पुलिस में शामिल हुए मनोज ने बताया, 'मेरे माता-पिता बूढ़े हैं और उनका इलाज चल रहा है। 600 किमी दूर ड्यूटी पर रहकर मेरे लिए उनकी देखभाल करना बहुत मुश्किल होगा।'

मनोज ने ये भी बताया कि वो परिवार में अकेला सदस्य है। उनके परिवार में 2 छोटे भाई और एक अविवाहित बहन समेत 6 लोग हैं।

कांस्टेबल मनोज को भेजा गया था लंबी छुट्टी पर
इससे पहले कॉन्स्टेबल मनोज को लंबी छुट्टी पर भेज दिया गया था। मनोज का पुलिस लाइन के बाहर रोने वाला वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो में उन्हें मेस में परोसे जाने वाले घटिया भोजन और पुलिसकर्मियों की दुर्दशा के बारे में बोलते देखा जा सकता है।

इस वीडियो को एक व्यक्ति ने रिकॉर्ड किया था। वीडियो में मनोज कहते हैं, "पुलिस 12 घंटे की ड्यूटी के बाद इस घटिया भोजन को खा रही है। यहां तक कि एक कुत्ता भी इसे नहीं खाएगा। अगर हमारे पेट में कुछ नहीं है तो हम कैसे काम कर सकते हैं?"

वीडियो के ऑनलाइन सामने आने के बाद फिरोजाबाद पुलिस ने एक ट्वीट में कहा कि कुमार ने पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न कारणों से अनुशासनहीनता और लापरवाही के लिए 15 मौकों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना किया था। इसके बाद एसएसपी आशीष तिवारी ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए थे।

जांच में मनोज का दावा निकला था गलत
जांच करने वाले डीएसपी हीरालाल कनौजिया ने कहा, "कांस्टेबल ने कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की थी। जांच के दौरान मेस में तैयार भोजन की गुणवत्ता सही पाई गई। कांस्टेबल मनोज की तरफ से लगाए गए आरोप निराधार थे। एकमात्र वैध आपत्ति ये थी कि उन्हें अपनी ड्यूटी के समय और मेस में खाना बनाने के समय के बीच संतुलन न होने के कारण गर्म खाना नहीं मिल रहा था।"

Updated on:
09 Dec 2022 07:36 pm
Published on:
09 Dec 2022 07:33 pm
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