प्रदेश सरकार तिल की खेती को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं के तहत किसानों को समय-समय पर सहायता प्रदान कर रही है।
खेती के तरीकों में लगातार बदलाव हो रहा है। अब किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ उन फसलों की खेती की ओर भी रुख कर रहे हैं, जिनसे उन्हें बेहतर मुनाफा मिल सके। इन्हीं में से एक है तिल की खेती, जिसे नगदी फसलों की श्रेणी में रखा जाता है। तिल की खेती से किसान अच्छा लाभ कमा सकते हैं, क्योंकि भारतीय बाजार में तिल के बीज की मांग और कीमत हमेशा बनी रहती है।
उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में किसानों को तिल की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिले के चारों तहसीलों में स्थित राजकीय कृषि रक्षा इकाइयों पर किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले तिल के बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सरकार द्वारा इन बीजों पर अनुदान भी दिया जा रहा है ताकि किसान कम लागत में तिल की खेती शुरू कर सकें।
अनुदान की दरें इस प्रकार हैं:
कृषि विभाग के प्रभारी अधिकारी नरेंद्र कुमार तिवारी के अनुसार, उच्च गुणवत्ता वाले तिल के बीज खेतों में तैयार होने पर बाजार में 100 से 1000 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिकते हैं। किसान अगर तकनीकी तरीके से तिल की खेती करें, तो वे एक बीघा जमीन से लाखों रुपये तक की कमाई कर सकते हैं।
प्रदेश सरकार तिल की खेती को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं के तहत किसानों को समय-समय पर सहायता प्रदान कर रही है। बीज पर अनुदान देकर किसानों को कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने के अवसर दिए जा रहे हैं। तिल की खेती, कम लागत और अच्छे बाजार मूल्य के कारण किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रही है।