आतंकवाद के विनाश के लिए बड़े हनुमानजी की विशेष पूजा

आईएसआईएसआई के खात्मे के लिए पवनपुत्र से अरदास

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Apr 22, 2016
hanuman temple
इलाहाबाद. चैत्र पूर्णिमा हनुमान जयंती पर तीर्थराज प्रयाग के संगम तट पर स्थित बंधवा मंदिर में महाबली हनुमान की विशेष पूजा अर्चना की गई। मंदिर में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। संगम तट का यह बड़े हनुमान जी का मंदिर दुनिया भर में हनुमान जी के परम सिद्ध पीठों मे शुमार है। कुम्भ नगरी में आज के दिन हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। संगम के रेती पर स्थित हनुमान मंदिर के मंहत आन्नद गिरी ने पत्रिका से मंदिर की 700 सौ वर्षो से हो रही पूजा अर्चना के विधि विधान को साझा किया और बताया की यह दुनिया का एक मात्र मंदिर है. जहां हनुमान जी लेटे हुए हैं। उन्होंने बताया कि इस बार हनुमान जयंती पर आंतकवाद, और आईएसआईएसआई जैसे आतंकवादी संगठनों के विनाश की कामना के साथ हो रही है।

सर्व प्रथम प्रयाग में ही हनुमान जी का सिंदूर का लेपन
महंत आन्नद गिरी के अनुसार लंका विजय के पश्चात भगवान राम माता सीता के साथ प्रयाग भरद्वाज ऋषि के आश्रम पहुंचे। उनके साथ भक्त हनुमान भी थे, कहा जाता है की हनुमान जी ने मोक्षदायनी गंगा के किनारे तीर्थराज में प्राण त्यागने और माता जानकी से पुर्नजन्म लेकर भगवान राम माता सीता की सेवा करने का विचार किया। यह सुनते ही सीताजी को आंसू आ गए। तब माता सीता ने कहा की हनुमान नाहीं रहा तो राम की महिमा कौन संसार को बताएगा। यही जानकी ने अपनी मांग का सिंदूर हनुमान के माथे पर लगा दिया और कहा की जब तक संसार में भगवान राम का नाम रहेगा तब तक हनुमान अजर अमर रहेगा। इस प्रकार हनुमान जी को सर्व प्रथम सिंदूर इसी संगम के तट पर माता सीता के द्वारा किया गया।

आतंकवाद के विनाश के लिए अनुष्ठान
आन्नद गिरी ने कहा कि दुनिया मे फैले आतंकवाद के विनाश के लिए विशेष अनुष्ठान होगा। आज की पूजा भारतीय सेना की विजय लिए के लिए होगी। सैनिको के लिए जप और पूजा से विशेष यंत्र और लाॅकेट बनाए जायेंगे जो उनकी रक्षा करेंगे। और महंत आन्नद गिरी ने कहा, यदि समय रहते आतंकवादी सोच नही बदलते तो इनका विनाश हो जाएगा।

Published on:
22 Apr 2016 08:55 pm
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