
इलाहाबाद. यूपी के सियासी जगत में भूचाल लाने वाले उन्नाव रेप केस व पीडि़ता के पिता की हत्या मामले में सीबीआई जांच की प्रगति से हाईकोर्ट खुश नहीं है। सीबीआइ ने चीफ जस्टिस डीबी भोसले व जस्टिस सुनीत कुमार की बेंच में जांच की सील बंद प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की है। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने सीबीआइ से 15 दिन में रिपोर्ट तलब कर ली है। कोर्ट में रेप पीडि़ता की मां ने एक और मांग कर दी है।
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रेप पीडि़ता की मां ने अपनी मांग में कहा है कि रेप पीडि़ता के पिता के खिलाफ ऑम्र्स एक्ट का फर्जी मुकदमा दर्ज कराने वाले पिंटू सिंह के लापता होने की भी जांच करायी जाये। बताते चले कि पिंटू सिंह ने ही रेप पीडि़ता के पिता के खिलाफ ऑम्र्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया था इसके बाद आरोप है कि पुलिस ने उन्नाव से बीजेपी के बाहुबली विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के इशारे पर रेप पीडि़ता के पिता को पकड़ा था और हवालात में पुलिस पिटाई के दौरान ही रेप पीडि़ता के पिता की मौत हो गयी थी। उन्नाव रेप कांड की धीमी प्रगति से हाईकोर्ट खुश नहीं है। हाईकोर्ट ने सीबीआइ से पीडि़ता के परिजनों का बयान लेने को भी कहा है साथ ही आरोपियों की जमानत निरस्त कराने व हवालात में मौत के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने को कहा है। सीबीआइ ने हाईकोर्ट में उन्नाव में पोस्को एक्ट के तहत दर्ज केस को लखनऊ ट्रांसफर करने की अर्जी दी है जिसे संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने आरोपियों को नोटिस जारी की है। साथ ही उच्च न्यायालय ने सीबीआइ को 15 दिन में फिर से अपनी प्रगति रिपोर्ट देने को कहा है।
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उन्नाव रेप कांड को लेकर हुई थी सीएम योगी सरकार की सबसे अधिक किरकिरी
सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार की उन्नाव रेप कांड व पीडि़ता के पिता की हवालात में मौत को लेकर जमकर किरकिरी हुई थी। उन्नाव से बीजेपी के बाहुबली विधायक कुलदीप सिंह सेंगर व उनके भाई पर पीडि़ता से रेप करने व पीडि़ता के पिता की हवालात में हत्या कराने का आरोप लगा है। आरोप है कि पुलिस ने सत्ता पक्ष के इशारे में लंबे समय तक पीडि़ता के गैंगरेप के आरोप का मुकदमा दर्ज नहीं किया था पीडि़ता ने जब सीएम योगी के आवास के सामने आत्मदाह का प्रयास किया था तब यह मामला मीडिया में आया था इसके बाद से आरोपी विधायक की गिरफ्तारी तक नहीं हुई थी। सीएम योगी पर जातिवाद की राजनीति करते हुए खास जाति के विधायक को बचाने का आरोप लगा था। सियासी जगत में जब इस मामले को लेकर भूचाल आया तो सीएम योगी सरकार ने आनने-फानन में सीबीआइ जांच की संस्तुति की थी और सीबीआइ ने रिकॉर्ड समय में प्रकरण को लेते हुए जांच आरंभ कर दी थी। होईकोर्ट ने इस मामले को स्वत: संज्ञान लेते हुए सरकार व सीबीआइ से जबाव मांगा था।
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