
इलाहाबाद. प्रदेश में अवैध खनन पर सरकारी कार्रवाई से इलाहाबाद हाईकोर्ट खासे नाराज है। रामपुर जिले में कोसी नदी में अवैध खनन के मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीबी भोसले और जस्टिस एमके गुप्ता की खण्डपीठ ने दो तत्कालीन जिलाधिकारियों को निलंबित करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट के इस आदेश से हड़कंप मच गया है। जिन अधिकारियों को हाईकोर्ट ने निलंबलित करने का आदेश दिया है, उसमें से एक राजीव रौतेला मुख्यमंत्री के जिले में बतौर डीएम तैनात हैं, जबकि दूसरे डीएम राकेश कुमार सिंह कानपुर के डीएम हैं । हाईकोर्ट ने रोक के बावजूद रामपुर में कोसी नदी से अवैध खनन जारी रखने के मामले मे कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने तत्कालीन दो जिलाधिकारियों को तत्काल निलंबित कर उनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई करने के मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं और 16 जनवरी को रिपोर्ट मांगी है। अवैध खनन में जिले के प्रशासनिक व् पुलिस अधिकारियों की भूमिका की भी जांचकर दोषी अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई कर दण्डित करने का भी आदेश दिया है।
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यह आदेश चीफ जस्टिस डीबी भोसले व जस्टिस एम के गुप्ता की खण्डपीठ ने मकसूद की जनहित याचिका पर दिया है। याची का कहना है कि रामपुर में नन्हे को बालू स्टोरेज का लाइसेंस दिया गया, जबकि 2015 में ही हाई कोर्ट ने अवैध खनन की जांच करने व दोषियों पर कार्रवाई का निर्देश दिया था। कोर्ट के सख्त आदेश की अनदेखी की गई और जांच न कर मामले पर पर्दा डाला गया। दागी ठेकेदार को अवैध तरीके से स्टोरेज लाइसेंस दे दिया गया। इसपर दोबारा याचिका दायर कर शिकायत की गई। इसपर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने रामपुर के तत्कालीन दो जिलाधिकारियों राजीव रौतेला व् राकेश कुमार सिंह को निलंबित कर कार्रवाई की रिपोर्ट तलब की है।
दरअसल, हाईकोर्ट ने मामले में डीएम रामपुर शिव सहाय अवस्थी को तलब किया और पूछा कि दागी ठेकेदार को स्टोरेज का लाइसेंस कैसे दे दिया। डीएम ने 16 जुलाई 2016 को दिए गए लाइसेंस को नवम्बर 2017 में निरस्त कर दिया। 2015 में एक माह में जांच के आदेश की अनदेखी कर सरकार ने दोषियों को बचाने का प्रयास किया। इतना ही नही स्टोरेज लाइसेंस दे दिया, जिसकी आड़ में अवैध खनन का धंधा पुलिस अधिकारियों की नाक के नीचे चलता रहा। प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों ने आंखे बंद कर लीं। अधिकारियो की शह पर चल रहे अवैध खनन के जिम्मेदार दो जिलाधिकारियों पर हाई कोर्ट का चाबुक चला है।