संगम में लगायी डुबकी, जानिए क्या है कहानी
प्रयागराज. बसंत पंचमी पर किन्नर अखाड़ा जब संगम में स्नान करने निकला तो साथ में चल रहे समर्थक हाथ में ऊंची तलवार लेकर चल रहे थे। किन्नर अखाड़े को देख कर लोगों की आंखें फटी जा रही थी।पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के खास बंदोबस्त किये थे। किन्नर अखाड़ा जिस मार्ग से निकलने वाला था वहां से लोगों को हटा दिया था। शान-शौकत के साथ किन्नर अखाड़ा ने संगम में डुबकी लगायी।
किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर आचार्य लक्ष्मीनारयण त्रिपाठी सबसे आगे चल रही थी और उनके पीछे किन्नर अखाड़ा के अन्य सदस्य शामिल थे। निर्धारित समय पर किन्नर अखाड़ा संगम पहुंचा और स्नान किया। किन्नर अखाड़े को देखने के लिए लोगों की भीड़ वहां पर पहले से जमा हो गयी थी। पुलिस प्रशासन ने भी सुरक्षा के पर्याप्त व्यवस्था की थी इसलिए स्नान करते समय किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी। किन्नर सिर पर कलश व मां काली की प्रतिमा लेकर चल रही थी।
प्रयागराज में पहली बार अखाड़े के साथ किया था स्नान
किन्नर अखाड़े के लिए प्रयागराज का कुंभ ऐतिहासिक हो गया है। पहली बार किन्नर अखाड़े के रुप में पहली बार स्नान करने का मौका मिला है। किन्नर अखाड़ा ने तीनों शाही स्नान किया है। किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर आचार्य लक्ष्मीनाराण त्रिपाठी ने पहले ही कहा था कि धर्म परिवर्तन रोकने के लिए किन्नर अखाड़ा बनाना बहुत जरूरी था। और इसी काम को किया गया है। किन्नर अखाड़े ने पहले ही शासन से आश्रम बनाने के लिए पांच करोड़ रूपये मांगे हैं।