प्रयागराज

#KUMBH 2019: क्या होता है कल्पवास जिसके लिए लाखों लोग बालू की रेत पर महीने भर गुजार देते हैं

कुम्भ मेले में कल्पवास का अत्यधिक महत्व माना गया है

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#KUMBH 2019: क्या होता है कल्पवास जिसके लिए लाखों लोग बालू की रेत पर महीने भर गुजार देते हैं

प्रयागराज. कुंभ मेले की सबसे बड़ी विशेषता यहां होने वाला कल्पवास है। इससे जुड़ने के लिए देश और दुनियां भर से लाखों लोग त्रिवेणी के तट पर पहुंचते हैं। कल्पवास का अर्थ होता है संगम के तट पर निवास कर वेदाध्ययन और ध्यान करना। प्रयागराज कुम्भ मेले में कल्पवास का अत्यधिक महत्व माना गया है।

कहा जाता है कि दिन रात भगवान की भक्ति में लीन होकर जो सुख और शांति लोगों को यहां मिलती है वो और कहीं बड़ी-बड़ी अट्टालिकाओं में भी नहीं मिल पाती। यही कारण है कि बिना किसी निमंत्रण और बुलावे के लोग संगम के किनारे चले आते हैं और कठिन तपस्या करते हैं। कल्वासी कहते हैं कि कोटि-कोटि देवी देवताओं के साथ मंजिल कब तय हो जाती है, पता ही नहीं चलता।

जी हां लाखों श्रद्धालु मोक्ष की आस लिए प्रयाग आते हैं। सुख-सुविधा से परे, घर-परिवार व नाते-रिश्तेदारों से दूर लोग कड़कड़ाती ठंड में रेती पर धुनी रमाते हैं। संतों का सानिध्य में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती उन्हें आध्यात्मिक ऊर्जा देती है। पुराणों के अध्य़यन पर मिलता है कि प्रयाग में गंगा-जमुना के आसपास घना जंगल था। इस जंगल में ऋषि-मुनि ध्यान और तप करते थे। ऋषियों ने गृहस्थों के लिए कल्पवास का विधान रखा। उनके अनुसार इस दौरान गृहस्थों को अल्पकाल के लिए शिक्षा और दीक्षा दी जाती थी।

ज्योतिर्विद पं सूर्यदेव बताते हैं कि स्कंद पुराण में प्रयाग में होने वाले कल्पवास का उल्लेख है। कल्पवास का मतलब मास पर्यंत साधना है। मान्यता यह भी है कि यम-नियम से इसे करने वाले साधक और उनके पुरखों के पाप धुल जाते हैं। वैसे यह कहा जाता है कि लगातार 12 साल तक कल्पवास करने पर ही इसे पूर्ण माना जाता है। सुख हो या दुख, कल्पवास बीच में नहीं छोड़ा जाता। तब यह खंडित मान लिया जाता है। सत्य बोलना, दूसरों की निंदा से बचना, घर-गृहस्थी की चिंता से मुक्त सिर्फ धार्मिक कृत्यों में लगे रहना, ब्रह्माचर्य का पालन का विधान तो है ही। कुछ अन्य कर्म भी जरूरी होते है, जैसे प्रतिदिन तीन बार स्नान और तुलसी को जल देना।
पद्म पुराण में इसका उल्लेख है। संगम तट पर वास करने वाले को सदाचारी, शान्त मन वाला तथा जितेन्द्रिय होना चाहिए। कल्पवासी के मुख्य कार्य है:- 1. तप, 2. होम और 3. दान होता है।

कल्पवासियों की दिनचर्या सुबह गंगा-स्नान के बाद संध्यावंदन से प्रारंभ होती है और देर रात तक प्रवचन और भजन-कीर्तन जैसे आध्यात्मिक कार्यों के साथ समाप्त होती है। ऐसी मान्यता है कि जो कल्पवास की प्रतिज्ञा करता है वह अगले जन्म में राजा के रूप में जन्म लेता है लेकिन जो मोक्ष की अभिलाषा लेकर कल्पवास करता है उसे अवश्य मोक्ष मिलता है।

Published on:
17 Jan 2019 12:58 pm
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