भारत में नवजात मृत्यु दर (NMR) वर्ष 2023 में 16.8 प्रति 1,000 जीवित जन्म रही, जो कि वैश्विक औसत से अब भी अधिक है। नवजात मृत्यु के प्रमुख कारणों में समय से पहले जन्म, संक्रमण और जन्म के समय श्वास की रुकावट शामिल हैं। इन स्थितियों का समय पर निदान और प्रभावी प्रबंधन मृत्यु दर को काफी हद तक घटा सकता है।
इस वर्ष विश्व स्वास्थ्य दिवस की थीम "स्वस्थ शुरुआत, आशाजनक भविष्य" (My Health, My Right – Safe beginnings, hopeful futures) के अंतर्गत विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। इस वैश्विक अभियान का उद्देश्य महिलाओं और नवजात शिशुओं की जीवनरक्षा को प्राथमिकता देते हुए, उनकी देखभाल की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है।
WHO की रिपोर्ट के अनुसार, हर साल लगभग 3 लाख महिलाएं प्रसव संबंधी जटिलताओं के कारण जान गंवाती हैं और 20 लाख से अधिक नवजात शिशु अपने जीवन के पहले महीने में ही मृत्यु का शिकार हो जाते हैं। यह हर 7 सेकंड में एक बचाई जा सकने वाली जान के खोने के बराबर है।
प्रयागराज स्थित मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग की अध्यक्ष, प्रोफेसर डॉ. अनुभा श्रीवास्तव, बताती हैं,
"विश्व स्वास्थ्य दिवस की यह थीम हमें हमारे नैतिक और सामाजिक उत्तरदायित्व की याद दिलाती है। प्रत्येक नवजात को जीवन का अधिकार है, और हमें सुनिश्चित करना होगा कि उसे सुरक्षित और स्वस्थ शुरुआत मिले।"
वह आगे कहती हैं, "हमारे विभाग में समय से पहले जन्मे शिशुओं, कम वजन वाले नवजातों और जन्म के समय श्वासावरोध जैसी स्थितियों के लिए विशेष निगरानी व उपचार की व्यवस्था है। एसएनसी यू (SNCU) को लगातार अपडेट किया जा रहा है, और स्टाफ को विश्वस्तरीय प्रोटोकॉल के अनुसार प्रशिक्षण दिया जा रहा है।"
भारत में नवजात मृत्यु दर (NMR) वर्ष 2023 में 16.8 प्रति 1,000 जीवित जन्म रही, जो कि वैश्विक औसत से अब भी अधिक है। नवजात मृत्यु के प्रमुख कारणों में समय से पहले जन्म, संक्रमण और जन्म के समय श्वास की रुकावट शामिल हैं। इन स्थितियों का समय पर निदान और प्रभावी प्रबंधन मृत्यु दर को काफी हद तक घटा सकता है।
WHO का इस वर्ष का संदेश स्पष्ट है—
हर महिला को गुणवत्तापूर्ण गर्भावस्था और प्रसव सेवाएं मिलें।
हर नवजात को सुरक्षित शुरुआत मिले।
स्वास्थ्य सेवाएं मानवाधिकार के रूप में सबके लिए सुलभ हों।
सरकारें, संस्थाएं और समाज मिलकर जिम्मेदारी निभाएं।
विश्व स्वास्थ्य दिवस 2025 की थीम केवल एक जागरूकता संदेश नहीं है, बल्कि एक वैश्विक अपील है— नवजात और मातृ स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की।
मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थान इस दिशा में रोल मॉडल बनकर उभर रहे हैं। प्रोफेसर डॉ. अनुभा श्रीवास्तव और उनकी टीम यह सिद्ध कर रही है कि सामर्थ्य, समर्पण और सिस्टम की शक्ति से हर नवजात को जीवनदान और हर माँ को सुरक्षा दी जा सकती है।