प्रयागराज

कुंभ मेले में घुम कर सूखी रोटी व चावल जुटा रहा गरीब परिवार, अपनों का नहीं इनका भरेगा पेट

बेहद दिलचस्प है इन 12 लोगों की कहानी, अन्न का सबसे अधिक सम्मान करता है यह परिवार
2 min read
• •
Updated: 7 Feb 2019, 4:31 PM IST
Waste food collection
Waste food collection

देवेश सिंह
प्रयागराज. अन्न के एक-एक दाने की कीमत क्या होती है यह सभी समझ नहीं सकते हैं। जिनको आसानी से अन्न मिल जाता है उनके लिए इसकी कीमत नहीं होती है लेकिन कुछ गरीब ऐसे भी होते हैं जिनके पास खुद खाने के लिए भोजन नहीं होता है लेकिन वह दूसरों के लिए भोजन जुटाने के लिए दिन-रात एक कर देते हैं। बांदा के 12 लोगों के परिवार की कहानी बेहद दिलचस्प है जो कुंभ मेले में घुम-घुम कर सफाई कर रहा परिवार गंदगी हटाने के साथ सूखी रोटी व चावल जुटा रहा है। संगम के पास झोपड़ी बना कर रह रहे परिवार के लिए इन सूखी रोटी व चावल की कीमत अनमोल है।


संगम के पास बनी झोपड़ी में जब सूखी हुई ढेर सी रोटी, बाटी व टोकरी में भरे हुए बासी चावल का भंडार देख कर सभी के कदम रुक जा रहे थे। पहले तो लगा कि यह परिवार अपने खाने के लिए ही सारी चीजे जुटा रहा होगा। लेकिन परिवार के सदस्य से बातचीत के बाद सारी कहानी खुल गयी। पत्रिका से बातचीत में बांदा के बगदा ने बताया कि वह कुंभ मेले के दौरान अपने १२ लोगों के परिवार के साथ कुंभ मेले में आये हैं और यहां पर मेले के दौरान साफ-सफाई करते हैं। इसी दौरान हम लोगों को फेंकी हुई रोटी, बाटी व चावल मिल जाता है जिसे जमा कर लेते हैं। यह सारी चीजे सूख गयी है और लोग इन्हें फेंक देते हैं लेकिन हम इसका स्टॉक जमा कर रहे हैं ताकि जानवरों को कुछ माह का भोजन उपलब्ध कराया जा सके।

परिवार का दावा नहीं होती रोटी खराब, आराम से खा लेते हैं जानवर
बगदा ने बताया कि अन्न तो अन्न होता है यदि हम इन्हें नहीं जुटाते हैं तो लोग फेंक देते हैं। अन्न बर्बाद हो जाता है जबकि अन्न का एक-एक दाना बेहद कीमती होती है। रोटी, चावल व बाटी सूख जाती है लेकिन खराब नहीं होती है। इसे जानवर आराम से खा लेते हैं। बगदा ने कहा कि साहब इस अन्न को बर्बाद करने की जगह किसी पेट का भर जाये तो क्या खराबी है।

कई कुंतल अन्न को बर्बाद होने से बचा रहा यह परिवार
बांदा का यह परिवार कई कुंतल अन्न को बर्बाद होने से बचा रहा है। पशुओं के चारे के रुप में इस अन्न का उपयोग किया जायेगा। सडऩे व बर्बाद होने की जगह यह अन्न किसी का पेट भरने के काम आयेगा। बगदा का परिवार इतना गरीब है कि वह अच्छे चारे तक की व्यवस्था नहीं कर सकता है लेकिन कुंभ में फेंकी मिली रोटी, चावल व बाटी का उपयोग करके वह पशुओं का पेट भरेगा।

Published on:
Also Read
View All
स्वराज भवन पहुंचीं आराधना मिश्रा मोना, बोलीं- हर कांग्रेसी के लिए मंदिर के समान है यह स्थान; सामाजिक न्याय पर भी दिया जोर

‘2027 के चुनाव में सपा हो जाएगी चारों खाने चित्त’, केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव पर साधा निशाना, कहा- भाजपा 2047 तक सत्ता में रहेगी

माफिया अतीक के गढ़ कसारी-मसारी का बदला नाम: सीएम योगी ने किया ‘श्रीकृष्ण पुरी’ करने का ऐलान

यूपी पुलिस सिपाही भर्ती का रिजल्ट घोषित, 32,679 पदों पर अभ्यर्थियों की सूची जारी, uppbpb.gov.in पर देखें रिजल्ट

प्रयागराज: माध्यमिक शिक्षा परिषद ने जारी किया हाई स्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा का टाइम टेबल