
Pitru Paksha Prayagraj:प्रयागराज में आज से पितृ पक्ष की शुरुआत हो गई है। पितरों के तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु त्रिवेणी संगम और शहर के प्रमुख घाटों पर पहुंच रहे हैं। हिंदू परंपरा में गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के संगम को पितरों के कर्मकांड के लिए विशेष महत्व दिया जाता है। श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने भी घाटों पर सुविधाएं बेहतर रखने के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी ने साफ-सफाई, प्रकाश, पेयजल और सुरक्षा के जरूरी इंतजाम समय से पूरा कराने को कहा है।
पितृ पक्ष 26 शनिवार से शुरू होकर 10 अक्तूबर को सर्वपितृ अमावस्या के दिन समाप्त होगा। इसी दिन पितृ विसर्जन किया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितरों की आत्मा की शांति और उनके आशीर्वाद से परिवार में सुख-समृद्धि और वंश वृद्धि के लिए श्राद्ध कर्म का विशेष महत्व माना जाता है। आश्विन कृष्ण पक्ष की शुरुआत 27 सितंबर से हो रही है, लेकिन श्राद्ध का पावन कार्य एक दिन पहले भाद्रपद पूर्णिमा से ही शुरू हो जाएगा। कृष्ण पक्ष में पूर्णिमा तिथि नहीं होती, इसलिए दिवंगत पूर्वजों का पूर्णिमा श्राद्ध 26 सितंबर को ही संपन्न किया जाएगा। कृष्ण पक्ष में पूर्णिमा तिथि नहीं होती, इसलिए दिवंगत पूर्वजों का पूर्णिमा श्राद्ध 26 सितंबर को ही संपन्न किया जाएगा।
महाभरणी श्राद्ध 29 सितंबर को होगा, जबकि मातृ नवमी श्राद्ध चार अक्तूबर को किया जाएगा। इसके बाद सात अक्तूबर को संन्यासी, यति और वैष्णव श्राद्ध के साथ मघा श्राद्ध भी संपन्न होगा। दुर्घटना या अकाल मृत्यु से प्रभावित परिजनों के लिए किया जाने वाला घात चतुर्दशी का श्राद्ध 9 अक्तूबर को पड़ेगा। इसके अगले दिन 10 अक्तूबर को सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितृ विसर्जन किया जाएगा। इस साल चतुर्थी और पंचमी तिथि का श्राद्ध एक ही दिन संपन्न होगा।
जिलाधिकारी ने संगम समेत शहर के प्रमुख घाटों पर साफ-सफाई, प्रकाश, पेयजल और सुरक्षा के इंतजाम समय से पूरा कराने को कहा है। प्रशासन का जोर इस बात पर है कि पितृ पक्ष के दौरान घाटों पर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो। पितृ पक्ष के दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने दिवंगत पूर्वजों के लिए तर्पण और पिंडदान करते हैं। इसे देखते हुए घाटों की सफाई और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं।