नेपाल नरेश हर वर्ष माघ मेले में गंगा स्नान के लिए सपरिवार यहां आते थे। शिवकुटि मंदिर के बगल में आज भी नेपाल नरेश की कोठी हैं। जिसमें अभी नेपाल के लोग रहते हैं नेपाल नरेश के परिवार ने 1865 में कोटि शिव मंदिर के बगल में एक विशाल आश्रम का निर्माण कराया राना पद्मजंग बहादुर ने वही पर शिव कचेहरी की स्थापना करवायी वर्तमान में शिव कचेहरी में 285 शिवलिंग स्थापित हैं।
जो अभी भी नेपाल नरेश की देख रेख में है कहा जाता है कि यहां पर सबके दुख दर्द सुने जाते हैं इस कचेहरी में बैठकर भगवान शंकर सब को न्याय देते हैं। पिछले 100 वर्षो से जो परिवार इस मंदिर की सेवा में है वह आज भी मंदिर की देख रेख कर रहा हैं प्रयाग आने वाले लोगों के लिए यह एक आकर्षण का केन्द्र हैं।
शिव कचेहरी में 285 शिवलिंग एक मंदिर प्रांगण में प्रतिष्ठित हैं जिनमें प्रमुख रुप से नागेश्वर चन्द्रेश्वर महादेव हैं नागेश्वर चन्द्रेश्वर महादेव की प्रतिमा पर स्पष्ट दिखायी देता हैं कि शिवलिंग पर अर्ध चन्द्राकार और नाग के फन का दर्शन होता हैं। वही शिव कचेहरी के मुख्य द्वार पर सिद्वेश्वर महादेव का मंदिर प्रतिष्ठित है इस शिवलिंग के चारों तरफ शिव की आकृति बनी हुयी है और समय समय पर यह अपना रंग बदलती रहती हैं।
इसके पुजारी शम्भूनाथ जी बताते है कि इस शिवलिंग में पिछले 40 वर्षो के दौरान साकक्षात शिव का दर्शन किया हैं। उनका कहना है की शिव की इस कचेहरी से लाखों भक्त जुड़े हैं और वह इस न्याय की मंदिर से कभी खाली नहीं जाते इस विशाल मंदिर में आने पर आपको लगेगा की आप स्वंय ईश्वरीय नगरी में हैं।
यह अकल्पनीय है की आप जहा खड़े हो आपके चारों तरफ सिर्फ और सिर्फ शिवलिंग स्थापित हो सौकड़ो शिवलिंग के बीच बैठे नन्दी जी मानो सच मुच आपका संदेश भगवान शिव को दे रहे हो मंदिर के बीच में बनी प्राचीन मंदिर जिसमें भगवान लक्ष्मी नारायण स्थापित है। उस मनोरम दृश्य की कल्पना शब्दों ब्यक्त नहीं की जा सकती। शहर के उत्तरी छोर पर गंगा नदी के किनारे यह दृश्य अत्यन्त ही मनोरम है।
शिव कचेहरी की स्थापना के समय सभी शिवलिंगों को नेपाल नरेश नर्मदेश्वर नदी के किनारे से लाये और गंगा नदी के किनारे उनकी प्राण प्रतिष्ठा की यह शिव कचेहरी इलाहाबाद ही नही बल्कि देश विदेश से आने वाले लोगो के लिए आकर्षण का केन्द्र हैं। प्रयाग की धरती एक ऐसी धरती जहां पर भगवान शिव स्वयं कचेहरी लगाते है।