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ममता बनर्जी को अपने ही गढ़ में मिल रही कड़ी चुनौती, बंगाल की सबसे हॉट सीट पर रोचक हुआ मुकाबला, क्या कहते हैं मतदाता?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections) के दूसरे और आखिरी चरण के लिए 29 अप्रैल को मतदान होगा। बंगाल चुनाव में इस बार भवानीपुर विधानसभा सीट (Bhabanipur Assembly Seat) पर रोचक मुकाबला देखने को मिल रहा है। इस बार के चुनाव में ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को अपने ही गढ़ में कड़ी चुनौती मिल रही है।

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Mamata Banerjee

ममता बनर्जी (Photo-IANS)

West Bengal Assembly Elections 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की सबसे चर्चित और हॉट सीट 'भवानीपुर' में सियासी तापमान चरम पर है। कोलकाता के बीच में स्थित यह क्षेत्र अपनी मिश्रित आबादी के कारण मिनी इंडिया कहा जाता है। इस क्षेत्र में 40-50% बांग्लाभाषी, करीब 40% गैर-बांग्लाभाषी (गुजराती, मारवाड़ी, सिख, बिहारी) और लगभग 20% मुस्लिम वोटर हैं।

ममता को अपने गढ़ में मिल रही चुनौती

पश्चिम बंगाल की भवानीपुर विधानसभा सीट मौजूदा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का गढ़ मानी जाती है। साल 2011 से यहां तृणमूल कांग्रेस (TMC) का कब्जा रहा है। साल 2021 में ममता बनर्जी ने इस सीट से 71.90% वोट हासिल करके बड़ी जीत दर्ज की थी। अब ये आंकड़े इतिहास हैं, इस बार TMC को अपने ही गढ़ में ऐड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है।

क्या कहते हैं मतदाता?

ग्राउंड पर मतदाताओं का मूड ‘देखा जाएगा’ वाला है। आशुतोष मुखर्जी रोड पर एक दुकानदार ने कहा- अब आपको भी पता है, हमें भी पता है। वोटर्स के इस प्रकार के जवाब इशारा करते हैं कि मुकाबला एकतरफा नहीं है। स्थानीय स्तर पर विकास और ‘दीदी’ की पकड़ मजबूत मानी जा रही है, लेकिन ‘परिवर्तन चाही’ की फुसफुसाहट भी सुनाई दे रही है। कई मतदाता साफ कहते हैं कि इस चुनाव में 'दीदी बनाम दादा' की सीधी लड़ाई है, जहां उम्मीदवार नहीं, बल्कि ममता बनर्जी और नरेंद्र मोदी का चेहरा निर्णायक होगा।

बाजारों में सन्नाटा, व्यवसाय दे रहा संकेत

हॉकर्स मार्केट के व्यापारियों में आर्थिक असंतोष स्पष्ट दिख रहा है। व्यापारियों का कहना है कि बिना कमीशन के कोई काम नहीं होता है। छोटे होते कारोबार और घटते ग्राहकों के बीच ‘भद्रो लोक’ भी बदलाव की बात कर रहे हैं। निवेश, उद्योग और रोजगार जैसे मुद्दे भाजपा के लिए नैरेटिव का स्पेस बना रहे हैं, जबकि टीएमसी स्थानीय कनेक्ट और योजनाओं पर भरोसा जता रही है।

SIR प्रक्रिया बन सकती है गेमचेंजर

भाजपा का दावा है कि इस बार समीकरण बदले हैं। 2021 में 58,832 वोट से जीतने वाली ममता की बढ़त 2024 के लोकसभा चुनाव में घटकर 3,492 रह गई। SIR में 60 हजार से ज्यादा नाम कटने के बाद कुल वोटर 2,05,553 से घटकर 1,60,313 रह गए हैं। भाजपा इसी अंकगणित के आधार पर 20 हजार वोट से जीत का दावा कर रही है, जबकि टीएमसी इसे राजनीतिक साजिश बताकर सुप्रीम कोर्ट तक जा चुकी है।

आंकड़ों से रणनीति, भावनाओं से जवाब

जातीय और सामाजिक समीकरण भी निर्णायक हैं। यहां करीब 42% बंगाली हिंदू, 34% गैर-बंगाली हिंदू और 24% मुस्लिम मतदाता हैं। भाजपा बूथ-स्तर पर माइक्रो-मैनेजमेंट कर रही है, वहीं TMC ‘घर की बेटी’ और ‘मोहल्ले की दीदी’ के भावनात्मक नैरेटिव को फिर से उभार रही है। लक्ष्मी भंडार, कन्याश्री जैसी योजनाएं उसके सामाजिक आधार को मजबूती देती हैं।

कोलकाता की अन्य सीटों पर नजर

कोलकाता की 11 सीटों पर फिलहाल टीएमसी का कब्जा है, लेकिन भाजपा को इस बार ‘खाता खुलने’ की उम्मीद है। महिला सुरक्षा, खासकर आरजी कर मेडिकल कॉलेज प्रकरण, बड़ा चुनावी मुद्दा बन चुका है। इस बार भवानीपुर में लड़ाई सिर्फ सीट की नहीं, बल्कि सियासी वर्चस्व और नैरेटिव की है।

भवानीपुर सीट से कितने उम्मीदवार मैदान में हैं?

  • ममता बनर्जी- तृणमूल कांग्रेस
  • शुभेंदु अधिकारी- भाजपा
  • श्रीजीव बिश्वास- CPI (M)
  • प्रदीप प्रसाद- कांग्रेस
  • पूनम बेगम- JUP

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