
TMC Rebel MPs Join NCPI (Image: ANI)
TMC Rebel MPs Join NCPI: पश्चिम बंगाल की राजनीति में मचे सियासी भूचाल के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों ने एक बड़ा राजनीतिक कदम उठाते हुए नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का दामन थाम लिया है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी से अलग हुए इन सांसदों के इस फैसले ने अचानक NCPI को राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात और केंद्र की एनडीए सरकार को समर्थन देने के ऐलान के बाद अब लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर NCPI क्या है, यह पार्टी कहां सक्रिय है और इसकी राजनीतिक भूमिका क्या रही है।
नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) त्रिपुरा आधारित एक क्षेत्रीय राजनीतिक दल है। पार्टी की राजनीतिक गतिविधियां मुख्य रूप से त्रिपुरा और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों तक सीमित रही हैं। क्षेत्रीय स्तर पर सक्रिय इस दल ने त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी।
अब तक NCPI राष्ट्रीय राजनीति में कोई बड़ा नाम नहीं रहा है लेकिन TMC के 20 सांसदों के इसमें शामिल होने के बाद इसकी राजनीतिक अहमियत अचानक बढ़ गई है।
TMC में बगावत के बाद जब सांसदों के एक बड़े समूह ने इस पार्टी में शामिल होने का फैसला किया, तब यह पार्टी सुर्खियों में आ गई।
बागी सांसदों में काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंद्योपाध्याय, शताब्दी रॉय और यूसुफ पठान जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। इन नेताओं के आने के बाद NCPI पहली बार लोकसभा स्तर पर चर्चा का विषय बनी है।
संसद के भीतर बागी सांसदों के इस समूह का नेतृत्व काकोली घोष दस्तीदार करती नजर आ रही हैं। हाल के दिनों में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात, मीडिया से बातचीत और बागी खेमे की गतिविधियों में काकोली घोष सबसे प्रमुख चेहरा बनकर उभरी हैं।
हालांकि, पार्टी के राष्ट्रीय संगठनात्मक ढांचे और शीर्ष पदाधिकारियों को लेकर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक रूप से सीमित है। लेकिन TMC से अलग हुए सांसदों के शामिल होने के बाद पार्टी की भूमिका और संरचना पर राजनीतिक गलियारों में नजर बनी हुई है।
TMC से अलग हुए सांसदों ने सीधे किसी बड़े राष्ट्रीय दल में शामिल होने के बजाय NCPI को चुना है। बागी खेमे ने लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष अपनी अलग राजनीतिक पहचान का दावा रखा है और एनडीए को समर्थन देने का भी ऐलान किया है।
दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात और उसके बाद लोकसभा अध्यक्ष से संपर्क को इसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
अब तक त्रिपुरा और पूर्वोत्तर भारत तक सीमित मानी जाने वाली नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) को TMC के 20 बागी सांसदों के शामिल होने से बड़ा राजनीतिक बल मिला है। जिन सांसदों ने वर्षों तक राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई है, उनके इस दल में आने से NCPI का दायरा और प्रभाव दोनों बढ़ गए हैं।
अब तक क्षेत्रीय स्तर पर पहचान रखने वाली यह पार्टी अचानक राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गई है। संसद में बड़ी संख्या में सांसदों के जुड़ने से NCPI की मौजूदगी पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत दिखाई दे रही है। यही वजह है कि राजनीतिक दलों और विश्लेषकों की नजर अब इस बात पर है कि आने वाले दिनों में यह नया राजनीतिक समीकरण किस दिशा में आगे बढ़ता है और संसद के भीतर NCPI की भूमिका क्या रहती है।
Updated on:
14 Jun 2026 09:31 pm
Published on:
14 Jun 2026 08:46 pm
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