प्रयागराज

उदयभान करवरिया की रिहाई से प्रयागराज की सियासत में भूचाल, कई नेताओं की उड़ी नींद

Udaubhan karawariya released: भाजपा के पूर्व विधायक उदयभान करवरिया की रिहाई ने कई नेताओं की नींद उड़ा दी है। भाजपा के इस नेता की रिहाई से अब प्रयागराज की सियासत में बड़ा बदलाव होगा। हमेशा से ही उदयभान को प्रयागराज का जमीनी नेता माना जाता रहा है। कभी उदयभान करवरिया ने अपने सगे भाइयों को सांसद और एमएलसी भी बनाया था।

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विधायक जवाहर पंडित हत्याकांड में सजायाफ्ता उदयभान करवरिया की रिहाई (Udaubhan karawariya released) को लेकर शासन से मंजूरी मिल गई है। डीएम और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की संस्तुति के बाद राज्यपाल द्वारा उन्हें रिहा किए जाने को लेकर अनुमति दी गई है। जैसे ही उदयभान करवरिया की रिहाई की खबर प्रयागराज तक पहुंची, वैसे ही जिले की सियासत में हलचल बढ़ गई। दरअसल उदयभान करवरिया जमीनी नेता माने जाते हैं, और उनके पास कार्यकर्ताओं की लंबी फौज है। प्रयागराज के मेजा, कारांव, बारा, शहर दक्षिणी, करछना आदि सीटों पर उदयभान किसी भी प्रत्याशी को हराने और जिताने का माद्दा भी रखते हैं। उनके जेल जाने के पहले इन सीटों पर जिसे उनका समर्थन होता था, वही यहां से विधायक चुना जाता था। उनके जेल जाने के बाद कई नेताओं का भविष्य उदय हुआ था। अब ऐसे में उनकी रिहाई के बाद उन नेताओं की नींद उड़ गई है। हां एक बात यह जरूर है कि उनकी रिहाई से इन सभी सीटों पर अब बीजेपी काफी मजबूत हो जाएगी।

कभी अपने भाइयों को बनाया था सांसद और एमएलसी
उदयभान करवरिया (Udaubhan karawariya released) की राजनितिक रसूख जनता में भी बहुत गहरी है। पिछले सालों में जब प्रदेश में मायावती की सरकार थी तब उदयभान करवरिया बारा विधानसभा से अकेले भाजपा के विधायक थे। इस दौरान उन्होंने अपने सगे बड़े भाई कपिलमुनि करवरिया को फूलपुर लोकसभा सीट से सांसद भी निर्वाचित कराया था। इसके अलावा छोटे भाई सूरजभान करवरिया को भी एमएलसी बनाया था। उस समय पूरे मंडल में करवरिया बंधुओं के राजनिति के उदाहरण दिए जाते थे। राजनिति के इस ऊंचाई के सूत्रधार उदयभान करवरिया ही थे।

उदयभान करवरिया की पत्नी नीलम करवरिया

उदयभान करवरिया ने अकेले जीत कर दी थी सीट
जब प्रदेश में एक एक सीट के भाजपा तरसती थी, तो उस समय उदयभान करवरिया बारा विधानसभा से विधायक निर्वाचित होकर भाजपा की सीटों की गिनती में बड़ा योगदान देते थे। विपरित परिस्थितियों में भी उनकी जीत केवल जनता के दम पर होती थी। उदयभान राजनिति में कदम रखते ही जनता के चहेते हो गए, और तब से लेकर आज तक जनता उनके इशारे पर राजनिति में रूचि लेने लगी।

उदयभान की पत्नी ने मेजा विधानसभा में (Udaubhan karawariya released) पहली बार खिलाया था कमल
उदयभान करवरिया जवाहर पंडित हत्याकांड में जेल में बंद थे। उनके दोनों भाई भी जेल जा चुके थे। तब साल 2017 में उदयभान करवरिया ने अपनी पत्नी को रसोईं से सीधे राजनिति में उतारा और भाजपा से मेजा विधानसभा ने उन्हें प्रत्याशी बनाया। नीलम करवरिया ने उदयभान की पहचान लेकर मेजा से चुनावी बिगुल फूंका और मेजा की जनता ने उन्हें यहां से विधायक बना दिया। उदयभान की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जेल में होने के बाद भी जनता ने उनकी पत्नी को विधायक बना दिया था।

पहले होती रिहाई तो इलाहाबाद लोकसभा सीट पर होती भाजपा की जीत
उदयभान करवरिया की रिहाई को थोड़ा लेट माना जा रहा है। प्रयागराज के भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि लोकसभा चुनाव के पहले ही इनकी रिहाई हो गई होती तो इस सीट पर भाजपा की ही जीत होती। भाजपा के हर नेता को पता है कि प्रयागराज में उदयभान का दबदबा बहुत है और वो बाहर होते तो निश्चित ही उनके पार्टी की जीत होती।

मुरली मनोहर जोशी को करीबी हैं उदयभान करवरिया
इलाहाबाद सीट से सांसद बनने के बाद ही मुरली मनोहर जोशी ने उदयभान करवरिया पर भरोसा जताया था। मानव संसाधन विकास मंत्री होने के बाद मुरली मनोहर जोशी ने उदयभान को अपना चहेता बना लिया था। तभी से यह माना जाने लगा कि प्रयागराज में मुरली मनोहर जोशी के सबसे करीबी उदयभान करवरिया ही हैं।

Published on:
20 Jul 2024 10:25 am
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