प्रयागराज

UPPSC RO ARO Result 2023: लंबा इंतजार खत्म, 419 अभ्यर्थी सफल घोषित

UPPSC ने आरओ-एआरओ 2023 परीक्षा का अंतिम परिणाम जारी किया, जिसमें 419 अभ्यर्थी सफल हुए। पेपर लीक के कारण देरी के बाद आए परिणाम से अभ्यर्थियों में खुशी की लहर।

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आरओ एआरओ 2023 रिजल्ट जारी, 419 अभ्यर्थी सफल, ढाई साल बाद मिला परिणाम (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

UPPSC RO ARO 2023 Final Result Declared: उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ( UPPSC) द्वारा आयोजित समीक्षा अधिकारी (आरओ) एवं सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) परीक्षा-2023 का बहुप्रतीक्षित अंतिम परिणाम रविवार देर रात घोषित कर दिया गया। लंबे इंतजार के बाद आए इस परिणाम ने हजारों अभ्यर्थियों की मेहनत को मुकाम दिया, जिसमें कुल 419 अभ्यर्थियों ने सफलता प्राप्त की है। खास बात यह है कि चयनित अभ्यर्थियों में 81 महिलाएं शामिल हैं, जो कुल का लगभग 19 प्रतिशत हैं।

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लंबे इंतजार के बाद मिला परिणाम

यह परीक्षा प्रक्रिया काफी समय से चर्चा में रही थी। भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत 9 अक्टूबर 2023 से हुई थी, लेकिन 11 फरवरी 2024 को आयोजित प्रारंभिक परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने के कारण इसे लेकर विवाद उत्पन्न हो गया था। इसके चलते पूरी प्रक्रिया प्रभावित हुई और अभ्यर्थियों को परिणाम के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। अंततः लगभग ढाई वर्षों के बाद आयोग ने अंतिम परिणाम घोषित कर दिया, जिससे अभ्यर्थियों ने राहत की सांस ली।

आरओ (सचिवालय) में अनिल पांडेय बने टॉपर

आरओ (सचिवालय) के कुल 322 पदों पर चयन प्रक्रिया पूरी की गई, जिसमें अनिल पांडेय ने प्रथम स्थान हासिल कर शीर्ष स्थान प्राप्त किया। दूसरे स्थान पर आदित्य प्रताप सिंह रहे, जबकि तीसरे स्थान पर महिला अभ्यर्थी लक्ष्मी वर्मा ने अपनी जगह बनाई। इस श्रेणी में प्रतिस्पर्धा काफी कड़ी रही, लेकिन शीर्ष तीन अभ्यर्थियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए सफलता हासिल की।

अन्य आरओ पदों पर भी घोषित हुए परिणाम

आरओ (यूपीपीएससी) के 13 पदों में भानु मिश्रा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं, आरओ (राजस्व परिषद) के तीन पदों में दिग्विजय सिंह ने टॉप किया। इन पदों पर चयनित अभ्यर्थियों ने अपनी योग्यता और मेहनत के दम पर सफलता अर्जित की है।

एआरओ पदों पर भी प्रतिभाओं का दमदार प्रदर्शन

एआरओ (सचिवालय) के 40 पदों के लिए हुई चयन प्रक्रिया में शम्सुल हुदा ने पहला स्थान प्राप्त किया। दूसरे स्थान पर आशीष कुमार द्विवेदी और तीसरे स्थान पर अनुपम कुमार उपाध्याय रहे। इसके अलावा एआरओ के अन्य पदों पर भी मेधावी अभ्यर्थियों ने सफलता हासिल की।

आरओ (राजस्व परिषद) के 23 पदों पर कुंवर शिवम सिंह ने शीर्ष स्थान हासिल किया, जबकि एआरओ (यूपीपीएससी) के 16 पदों में गणेश त्रिपाठी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसी तरह एआरओ (लेखा) के दो पदों में सजल कुमार सिंह ने पहला स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।

महिलाओं की भागीदारी बनी चर्चा का विषय

इस परीक्षा में 81 महिलाओं का चयन होना भी एक महत्वपूर्ण पहलू है। कुल चयनित अभ्यर्थियों में महिलाओं की 19 प्रतिशत भागीदारी यह दर्शाती है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। लक्ष्मी वर्मा जैसी अभ्यर्थियों ने शीर्ष स्थान हासिल कर यह साबित किया है कि महिलाएं भी हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं।

कड़ी प्रतिस्पर्धा और कठिन चयन प्रक्रिया

आरओ-एआरओ परीक्षा उत्तर प्रदेश की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। इसमें लाखों अभ्यर्थी हिस्सा लेते हैं, लेकिन अंतिम चयन केवल कुछ सैकड़ों का ही हो पाता है। ऐसे में इस परीक्षा में सफलता प्राप्त करना अभ्यर्थियों के लिए बड़ी उपलब्धि होती है।

इस बार भी परीक्षा प्रक्रिया काफी चुनौतीपूर्ण रही। प्रश्नपत्र लीक जैसी घटना ने जहां अभ्यर्थियों को मानसिक रूप से प्रभावित किया, वहीं आयोग के लिए भी यह एक बड़ी चुनौती बन गई थी। बावजूद इसके, अंततः पारदर्शी तरीके से चयन प्रक्रिया को पूरा किया गया।

अभ्यर्थियों में खुशी की लहर

परिणाम घोषित होते ही सफल अभ्यर्थियों में खुशी की लहर दौड़ गई। कई अभ्यर्थियों ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और कठिन परिश्रम को दिया। सोशल मीडिया पर भी सफल अभ्यर्थियों को बधाई देने का सिलसिला शुरू हो गया। वहीं, जो अभ्यर्थी इस बार सफलता हासिल नहीं कर सके, वे भी भविष्य में बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयारी में जुटने की बात कह रहे हैं।

यूपीपीएससी की पारदर्शिता पर जोर

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से पूरा करने का दावा किया है। आयोग का कहना है कि परीक्षा से जुड़े सभी पहलुओं की गहन समीक्षा के बाद ही अंतिम परिणाम जारी किया गया है। इस परीक्षा ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए धैर्य, निरंतर मेहनत और सकारात्मक दृष्टिकोण बेहद जरूरी है। लंबे इंतजार और चुनौतियों के बावजूद जिन अभ्यर्थियों ने अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखा, वही अंततः सफलता हासिल कर सके।

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