पुणे

‘धुरंधर’ गाने पर रील्स बनाकर बेच रहे थे नकली नोट, महाराष्ट्र पुलिस ने घर तक डिलीवरी देने वाले 2 जालसाजों को दबोचा

Maharashtra Cyber Police: महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने इंस्टाग्राम पर नकली नोट बेचने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया। 'धुरंधर' फिल्म के गानों पर रील बनाकर आरोपियों ने लाखों की ठगी की। इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

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Apr 07, 2026
(Screengrab from video)

Maharashtra Crime: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर नकली भारतीय मुद्रा (FICN) को सस्ते दामों पर बेचने और उसकी 'होम डिलीवरी' का दावा करने वाले एक बड़े गिरोह पर महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने शिकंजा कसा है। पुलिस ने इस मामले में राहुल अनिल पवार और योगिता भोसले नाम के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह मुख्य रूप से महाराष्ट्र के धुले, जलगांव और बुलढाणा जिलों में सक्रिय था।

पुलिस ने जब इस मामले की जांच की पता चला कि आरोपी अपनी रील्स के बैकग्राउंड में हालिया फिल्म 'धुरंधर-द रिवेंज' के गानों का इस्तेमाल कर रहे थे। गौरतलब है कि इस फिल्म की कहानी भी नकली नोटों के मुद्दे पर आधारित है। इन वीडियो में भारी मात्रा में जाली नोट दिखाए जाते थे और साथ ही एक व्हाट्सएप नंबर दिया जाता था, ताकि इच्छुक लोग संपर्क कर सकें।

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कैसे फंसाते थे जाल में?

साइबर पुलिस के अनुसार, ये इंस्टाग्राम अकाउंट भ्रामक कंटेंट के जरिए लोगों को अवैध लेनदेन के लिए ललचाते थे। गिरोह दावा करता था कि वे 1 लाख रुपये के असली नोट के बदले 5 से 8 लाख रुपये के नकली नोट देंगे। कई मामलों में पैसे लेने के बाद नकली नोट डिलीवर नहीं किए जाते थे, जबकि कुछ मामलों में आमने-सामने की मुलाकात के दौरान लूटपाट भी की गई। इतना ही नहीं, आरोपी खरीदारों को यह कहकर डराते थे कि उनके संबंध स्थानीय अपराधियों से हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नकली नोटों का यह कारोबार केवल एक वित्तीय अपराध नहीं है, बल्कि यह टेरर फाइनेंसिंग (आतंकी फंडिंग) और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को भी बढ़ावा दे सकता है। इसे देखते हुए पुलिस ने आईटी एक्ट और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की है।

विपक्ष ने भी उठाए थे सवाल

मार्च 2025 में कर्नाटक के कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे ने इन रील्स को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए सवाल उठाए थे कि वीडियो में दिखने वाली आधुनिक प्रिंटिंग मशीनें आरोपियों के पास कहाँ से आईं। इस बीच एक साइबर सुरक्षा फर्म ‘CloudSEK’ ने भी इस मुद्दे पर जांच की, जिसकी रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर 2024 से जून 2025 के बीच 4,500 से अधिक पोस्ट और 750 सोशल मीडिया अकाउंट नकली नोटों की बिक्री में शामिल पाए गए, वहीं इस दौरान करीब 410 फोन नंबर भी चिन्हित किए गए जो इस अवैध धंधे से जुड़े थे।

फिलहाल, महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने इस मामले में चार एफआईआर (FIR) दर्ज की हैं, जिनमें से दो नोडल साइबर पुलिस स्टेशन और दो बुलढाणा व जलगांव पुलिस द्वारा दर्ज की गई हैं। पुलिस अब इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

Published on:
07 Apr 2026 06:13 pm
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