पुणे सिविक बॉडी ने बड़ा फैसला किया है। पिंपरी चिंचवाड़ नगर निगम (पीसीएमसी) ने ट्रांसजेंडरों को सुरक्षा गार्ड और ग्रीन मार्शल के रूप में रोजगार के अवसर प्रदान करने वाला राज्य का शायद पहला सिविक बॉडी है, जिन्हें अक्सर समान अधिकारों से वंचित किया जाता है।
महाराष्ट्र के पुणे सिविक बॉडी ने बड़ा फैसला किया है। देशभर में ट्रांसजेंडर लोगों के आगे हाथ फैलाते दिखाई देते हैं, लेकिन पुणे के समीप स्थित पिंपरी चिंचवड़ नगर निगम ने उन्हें आत्म निर्भर बनाने के लिए एक अनोखी पहल की है। नगर निगम ने ट्रांसजेंडरों को सुरक्षा गार्ड और ग्रीन मार्शल की नौकरी दी है। कुछ महीने पहले 23 वर्षीय एक ट्रांस-महिला (शाइना रॉय) घूम-घूमकर दुकानों और ट्रैफिक सिग्नल पर भीख मांगती थी, लेकिन उसने नई जिंदगी शुरू की है। वह अब रोज वर्दी पहनकर पिंपरी चिंचवड़ नगर निगम में अपनी ड्यूटी देने जाती है।
इसके साथ ही पिंपरी चिंचवड़ महाराष्ट्र और संभवत: पूरे देश में किन्नरों या ट्रांसजेंडरों को रोजगार देने वाला नगर निकाय बन गया है। पिंपरी चिंचवड़ के नगर आयुक्त राजेश पाटिल ने किन्नर समुदाय के सदस्यों को मुख्यधारा में लाने और उन्हें सम्मानजनक जिंदगी जीने में मदद करने का फैसला किया। पाटिल ने कहा कि सब जानते हैं कि ट्रांसजेंडर समुदाय को बहुत दिक्कतों का सामना पड़ता है और दुर्व्यवहार और शोषण का शिकार होता है। यह भी पढ़ें: Mumbai: ठगो ने महिला को अनोखे तरीके से दिया धोखा, बेटी को बनाना चाहती थी चाइल्ड मॉडल
ट्रांसजेंडर को ऑफिस में लाने और सम्मानजनक जिंदगी देने करने के लिए हमने कुछ प्लान बनाए हैं। हमने नगर निगम में 30 से 35 ट्रांसजेंडरों की नियुक्ति की है। इनमें से कुछ को ग्रीन मार्शल बनाया गया है। ये स्वच्छता अभियान में हमारा सहयोग करेंगे। वहीं, अन्य को नगरीय निकाय में बतौर सुरक्षा गार्ड तैनात किया गया है, जबकि कुछ अन्य को शहर के बगीचों की साज संभाल का जिम्मा सौंपा गया है।
नगर आयुक्त राजेश पाटिल ने कहा कि इन ट्रांसजेंडरों की नियुक्ति एक जुलाई को की गई थी और अब तक वे अच्छा काम कर रहे हैं। उम्मीद है कि यह अवसर निश्चित रूप से उन्हें अपनी पहचान बनाने और सम्मान के साथ जिंदगी जीने में मदद करेगा। कुछ किन्नरों को कॉन्ट्रेक्ट वर्कर बनाया गया है, उन्हें न्यूनतम मजदूरी मिलेगी, जो उन्हें अन्य सुरक्षा गार्डों और ग्रीन मार्शलों की तरह जीवन जीने में मदद करेगी।
किन्नर रूपा टकसाल (31) को सुरक्षा गार्ड के रूप में नियुक्त किया गया है। उसे नगर निगम आयुक्त कार्यालय के बाहर तैनात किया गया है। रूपा टकसाल ने कहा कि मैंने कभी सड़कों पर भीख नहीं मांगी। यहां नौकरी मिलने से पहले, मैंने एक एनजीओ में प्रोजेक्ट असिस्टेंट और काउंसलर के रूप में काम किया था। मैंने भारत में पहला ट्रांसजेंडर क्लिनिक (मित्र क्लिनिक) के साथ लॉजिस्टिक्स असिस्टेंट के रूप में भी काम किया था। रूपा ने ट्रांस-मेन (जो महिला से पुरुष बनते हैं) के लिए भी नौकरी की मांग की है।