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Pune News: केंद्रीय मंत्री के समक्ष छात्रा ने उठाया ‘सैनिटरी पैड डिस्पोजल मशीन’ की कमी का मुद्दा, जितेंद्र सिंह ने दिया ये जवाब

महाराष्ट्र के पुणे में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के साथ बातचीत में राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला की पीएचडी की एक छात्रा ने वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के कई संस्थानों में उचित सैनिटरी पैड निपटान प्रणाली की कमी का मुद्दा उठाया। इसको लेकर उसने जितेंद्र सिंह से एक सवाल पूछ लिया।

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Aug 22, 2022
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Jitendra Singh

महाराष्ट्र के पुणे के एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह मौजूद थे। इस दौरान जितेंद्र सिंह के साथ बातचीत में राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला की पीएचडी की एक छात्रा ने वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के कई संस्थानों में उचित सैनिटरी पैड निपटान प्रणाली की कमी का मुद्दा उठाया। रविवार को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री ने बातचीत के दौरान इस परेशानी को स्वीकार किया, जबकि राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला (एनसीएल) के निदेशक ने कहा कि इसके समाधान के लिए एक तंत्र पर काम जारी है और इसे जल्द ही छात्रावासों तथा प्रयोगशालाओं में लगाया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह सीएसआईआर-यूआरडीआईपी की नई इमारत का उद्घाटन करने एनसीएल पहुंचे थे। पीएचडी की छात्रा ने मंत्री से पूछा कि हाल ही में हमने सीएसआईआर के कई इंस्टीटूशन में ‘सैनिटरी पैड डिस्पोज़ल मशीन’ की कमी का सामना किया है, तो आखिर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय महिला शोधकर्ताओं की बेहतरी के लिए क्या कर रहा है? यह भी पढ़ें: Ganesh Chaturthi 2022: BMC ने गणेश मंडलों के लिए जारी की नई गाइडलाइन, इन नियमों का पालन करना जरुरी

बता दें कि छात्रा के इस सवाल का जवाब देते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि बिल्कुल, यह एक बड़ी समस्या है। मुझे लगता है कि पहले कम महिला शोधकर्ता थीं इसलिए ऐसा है। जैसे-जैसे महिला शोधकर्ताओं की संख्या बढ़ रही है इसकी व्यवस्था भी की जाएगी। कुछ साल पहले एक प्रमुख मेडिकल इंस्टिट्यूट का दौरा किया था और वहां महिलाओं के लिए उपयुक्त शौचालय नहीं थे। मैंने कहा कि कम से कम एक शौचालय की व्यवस्था करिए, रात ड्यूटी करने वाले चिकित्सकों का क्या होगा? लेकिन अब इसको लेकर जागरूकता बढ़ रही है और इसका ध्यान रखा जा रहा है।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने एनसीएल के निदेशक डॉ आशीष लेले को पीएचडी छात्रा द्वारा उठाए गए मुद्दे पर विस्तार से बताने को कहा। इसके बाद आशीष लेले ने बताया कि एक स्टार्ट-अप इस मुद्दे पर काम कर रहा है और जल्द ही इसके लिए एक हल निकाला जाएगा। एक ऐसा हल खोज रहे हैं, जिसे छात्रावासों और प्रयोगशालाओं में लगाया जा सके। इसमें थोड़ा वक्त जरुर लग रहा है, लेकिन इस पर काम जारी है। जितेंद्र सिंह ने एनसीएल में एक पायलट संयंत्र ‘बिस्फेनॉल' का भी उद्घाटन किया। बिस्फेनॉल पॉलीकॉर्बोनेट और अन्य इंजीनियरिंग प्लास्टिक के उत्पादन के लिए आवश्यक है।

Updated on:
22 Aug 2022 04:38 pm
Published on:
22 Aug 2022 04:36 pm