आखिर योगी सरकार में बच्चों को शिक्षा देने वाले एक शिक्षा मित्र ने अपने सपने को सजा रखा था
रायबरेली. आखिर योगी सरकार में बच्चों को शिक्षा देने वाले एक शिक्षा मित्र ने अपने सपने को सजा रखा था कि देश के बच्चों को एक अच्छा इन्सान बनायेंगें। जिससे मेरा और इस समाज एवं देश का नाम रोशन होगा। जिसके लिये पुलिस की लाठीयां भी खायी और सड़कों पर संघर्ष भी किया था। लेकिन शायद शिक्षा देने वाले इस गुरु को अपना जीवन अपने अन्दर ही संघर्ष करते करते अपना जीवन समाप्त करना होगा ये शायद उसने कभी नही सोचा होगा। शिक्षा मित्र का संघर्ष उसके साथी बेकार नही जाने देगें।
रायबरेली, सुबह सुबह एक मां अपने बेटे का बेसब्री से खाने के लिये इन्तजार कर रही थी कि बेटा आयेगा और उसको मैं अपने हाथों से खाना परोस कर रोज की तरह खाना खिलाउंगी। लेकिन, शायद मां को ये बात पता नहीं थी कि उसका दिल का टुकड़ा अब इस दुनिया को अलविदा कर गया है। मां अपने बेटे का शव फंदे पर देख मां का दिल बैठ गया और उसके आंसू रुकने का नाम नही ले रहे थे और वह बिलख-बिलख कर रो रही थी। घटना की भनक जैसे ही मायके गई पत्नी को लगी, वह बदहवाश होकर परिजनों के साथ घटनास्थल पर पहुंची। मृतक के डेढ़ वर्ष के पुत्र आयुष को क्या पता था कि अब उसका पिता अब इस दुनिया में नहीं है।
कोतवाली क्षेत्र के पूरे डीह मजरे बैखरा गांव निवासी रामेश्वर यादव के तीन पुत्र हैं। अनिल कुमार शिक्षामित्र था मझले नंबर का था। प्रतिदिन की तरह सुबह उसे सात बजे अमावां ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय कुसिहा स्कूल में पढ़ाने के लिए जाना था।
घरवाले बताते हैं कि वह सुबह उठा और ऊपर कमरे में चला गया। उसकी मां खाना बनाकर बेटे का इंतजार कर रही थी। मृतक के परिजन बताते हैं जब अनिल काफी देर तक नीचे खाना खाने नहीं आया तो उसकी मां उसे छत पर बुलाने गई। घटना देख वह फफक कर रो पड़ी। रोने बिलखने की आवाज पर पास पड़ोस के लोग इकट्ठा हो गए, लाडले को फांसी के फंदे पर देख उसकी मां व परिजन दहाड़ें मारकर रो पड़े।
इससे पहले भी जिले के एक शिक्षामित्र की मौत तनाव के चलते हो चुकी है। 25 जुलाई 2017 को समायोजन निरस्त करके जैसे ही उन्हें फिर से शिक्षामित्र बना दिया गया तो इस बात को लेकर शिक्षामित्र रमेश पाल बहुत व्यथित था। वह डलमऊ ब्लाक के प्रा.वि. चकभीटी में कार्यरत था। समायोजन निरस्त होने के विरोध में जिला मुख्यालय में आयोजित धरना प्रदर्शन में शामिल होने आया था और 29 जुलाई को घर वापस लौटते समय शहर के मुंशीगंज के पास उसकी बाइक ट्रक से भिड़ गई थी और उसकी दर्दनाक मौत हो गई थी।
संगठन के पदाधिकारियों ने जताया शोक
शिक्षामित्र वेलफेयर एसो. महामंत्री पुष्पेंद्र त्रिवेदी, कोषाध्यक्ष विष्णुशरण मौर्य, लक्ष्मी प्रताप सिंह, अजीत सिंह ने साथी की मौत पर गहरा शोक जताया है। उन्होंने कहा कि शिक्षामित्र अनिल कुमार अवसादग्रस्त रहते थे। उन्हीं की तरह तमाम शिक्षामित्र तनाव और अवसाद से ग्रस्त हैं। उन लोगों के प्रकरण का कोई हल नहीं निकाला गया। यदि कोई राहत नहीं दी गई तो ऐसी घटनाएं संभावित हैं।
बताते हैं मृतक के पिता रामेश्वर चंदापुर में पोस्टमैन के पद पर कार्यरत हैं। उसका शिक्षामित्र बेटा अनिल कुमार व पिता मिलकर घर का घरेलू खर्चा चलाते थे। परिजन बताते हैं कि उसे कई माह से मानदेय भी नहीं मिला था। लखनऊ के एक निजी चिकित्सा केंद्र से उसका इलाज होने की भी बात सामने आई है। मृतक के पिता रामेश्वर ने बताया शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक पद पर समायोजन ना होने से उसका बेटा अवसादग्रस्त रहता था। बताते हैं कि कई माह से मानदेय ना मिलने से भी वह आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। कोर्ट का फैसला आने के बाद से वह नौकरी को लेकर निराश हो गया था। सोमवार की सुबह उसके घर पर काल बनकर टूटी। हंसी खुशी के साथ रहने वाले परिवार के सारे सपने एक ही पल में बिखर गए।