रायगढ़

अनहोनी के डर से यहां नहीं जलाते होलिका, न खेलते हैं रंग, इसके पीछे ये खौफनाक कहानी

होली के रंग में पूरा देश सराबोर है, वहीं एक एेसा इलाका है जहां अनहोनी के डर से न तो होलिका जलाते हैं और न होली खेलते हैं।
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Feb 28, 2018
holi 2018

जयंत कुमार सिंह/रायगढ़. छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के बरमकेला ब्लाक के हट्टापाली समेत छिंदपतेरा, मंजूरपाली, जगदीशपुर, अमलीपाली में करीब 100 सालों से शेर आने के भय से होली नहीं मनाया जाता है। यहां के लोगों की रंग खेलने की इच्छाओं पर अनहोनी का भय हावी है।

लगभग 100 साल से यहां पर न तो रंग लगाया जाता है, न गुलाल उड़ाए जाते हैं, फागुन के गीत इस गांव में वर्जित है। गांव के बुजुर्गों का कहना है, उन्हें भी ये नहीं मालूम है कि कब से होली नहीं मनाई जा नही रही है, पर जबसे उन्होंने होश संभाला व अपने पूर्वजों से पूछा तो गांव में होली नहीं मनाने की बात कही गई। पूछताछ में पता चला, कई दशकों पहले गांव में होलिका दहन पर पास के जंगल से एक शेर गांव में आ गया और गांव के गौटिया (जमींदार) को उठा ले गया था।

बैगा को आया था सपना
घटना के दूसरे वर्ष गांव के बैगा को एक सपना आया और उस सपने में यह कहा गया कि गांव में मंजुरपलिहिन देवी की स्थापना करो और उसकी पूजा करो, साथ ही यह भी निर्देश दिया गया कि गांव में अब से होली का त्योहार नहीं मनाना है। इसके बाद गांव में बैठक हुई और इस सपने पर चर्चा की गई फिर ग्रामीणों ने इस पर्व को नहीं मनाने का निर्णय लिया। इस कहानी को बुजुर्ग तो बुजुर्ग बच्चे भी पूछने पर दोहराते हैं। इसके बाद से उस गांव में अब तक रंग और पिचकारी का उत्सव नहीं मन सका है।

हट्टापाली के छुटकू राम ने बताया कि हमारे गांव में दादा, परदादा के आगे के जमाने से होली नहीं मनाई जाती है। कहा जाता है कि होली के दिन गांव के गौटिया को बाघ उठा ले गया था। इसके बाद बैगा को सपना आया और तब यह निर्णय लिया गया कि अब से होली नहीं मनाई जाएगी।

Published on:
28 Feb 2018 05:53 pm