
एक ओर जहां नए विपणन वर्ष के लिए धान खरीदी व कस्टम मिलिंग शुरू हो गया है तो वहीं दूसरी ओर दर्जन भर से अधिक मिलरों ने पिछले विपणन वर्ष में उठाव किए गए धान के एवज में पूरा चावल अब तक जमा नहीं किया है। जबकि देखा जाए तो उक्त मिलों में पुराना एक भी धान नहीं है, लेकिन इन मिलरों पर कार्रवाई करने के बजाए जमा करने के लिए समय दिया जा रहा है। हर वर्ष समर्थन मूल्य में धान खरीदी के बाद कस्टम मिलिंग के लिए मिलर अनुबंध कर धान का उठाव करते हैं और उठाव किए गए मात्रा के एवज में चावल एफसीआई व नान में जमा करना होता है, लेकिन पिछले वर्ष उठाव किए गए धान के एवज में करीब दर्जन भर मिलरों ने अब तक करीब ७० हजार क्विंटल चावल जमा नहीं किया है, आश्चर्य की बात तो यह है कि उक्त मिलों में पुराना धान भी नहीं है और नान व एफसीआई में चावल भी नहीं पहुंचा। ऐसी स्थिति में संबंधित मिलरों पर कार्रवाई करने के बजाए उनको चावल जमा करने के लिए मौका दिया जा रहा है। कुछ दिन पूर्व तक की स्थिति में देखा जाए तो जमा करने के लिए चावल की शेष मात्रा १ लाख १४ हजार ९६० क्विंटल थी जिसमें ६०,७१० क्विंटल एफसीआई का तो ५४२५० क्विंटल नान का था। हांलाकि इसमें कुछ लोगों द्वारा जमा करने के बाद यह आकड़ा कम होकर करीब ७० हजार क्विंटल पर आया है।
सारंगढ़ में भी ६६ हजार क्विंटल नान में जमा करना शेष
नवगठित सारंगढ़ जिले में देखा जाए तो सबसे अधिक मात्रा में चावल जमा करना शेष है। यहां सिर्फ नान में ६६ हजार ६६६ क्विंटल चावल जमा करना शेष है। जिले के २८ मिलरों का नाम सूची में है जिसमें से करीब २० से अधिक मिलरों के पास बड़ी मात्रा में चावल लेना बाकी है।