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Chhattisgarh Land Scam: 15 साल सर्वे में उलझा रहा प्रशासन, इधर शेल कंपनियों ने बेच डाली 526 एकड़ सीए भूमि

Shell Companies Land Deal: छत्तीसगढ़ में 526 एकड़ कैचमेंट एरिया (सीए) भूमि की खरीद-फरोख्त पर बड़ा सवाल खड़ा हुआ है। आरोप है कि 15 साल तक सर्वे प्रक्रिया चलती रही, जबकि शेल कंपनियों के जरिए जमीन खरीदकर महाजेंको को बेच दी गई।
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Chhattisgarh Land Scam

बिक गई 526 एकड़ भूमि (photo source- Patrika)

Chhattisgarh Land Scam: रायगढ़ जिले के नक्शाविहीन ग्राम नटवरपुर और चक्रधरपुर में एक ओर पिछले करीब 15 वर्षों से आईआईटी रूड़की के माध्यम से राजस्व नक्शा तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है, वहीं दूसरी ओर इन्हीं गांवों की 526 एकड़ (219.424 हेक्टेयर) भूमि की खरीद-बिक्री पूरी कर उसे महाजेंको को सौंप दिया गया। यह पूरा सौदा शेल कंपनियों के नाम पर दर्ज जमीन के जरिए हुआ, जबकि राजस्व रेकॉर्ड और सीमांकन की प्रक्रिया अभी तक अंतिम रूप नहीं ले सकी है।

Catchment Area Land: 214 हेक्टेयर भूमि का कब्जा

दस्तावेजों के अनुसार, रायपुर की लर्न नेचर कंसल्टेंट्स को महाजेंको ने क्षतिपूर्ति वनीकरण (सीए) के लिए भूमि उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी थी। कंपनी ने नटवरपुर, चक्रधरपुर और बंगुरसिया क्षेत्र की जमीन खरीदकर महाजेंको को हस्तांतरित कर दी, जिसके बाद वन विभाग ने डीजीपीएस सर्वे के आधार पर करीब 214 हेक्टेयर भूमि का सीमांकन कर कब्जा लेकर घेराव और पौधरोपण का कार्य भी शुरू कर दिया है।

वहीं भू-अभिलेख विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिले के 15 गांव नक्शाविहीन हैं। इनमें से 8 गांवों के नक्शे तैयार होकर अंतिम प्रकाशन के लिए भेजे जा चुके हैं। नटवरपुर में सत्यापन कार्य जारी है, जबकि चक्रधरपुर का प्रारंभिक प्रकाशन होना शेष है।

बगैर नक्शे के आधार पर हो गया सौदा

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन गांवों का अधिकृत राजस्व नक्शा अभी तक अंतिम रूप से प्रकाशित नहीं हुआ, वहां 157 खसरा नंबरों की 219.424 हेक्टेयर भूमि की खरीद-बिक्री केवल नजरी नक्शे और मौके के कब्जे के आधार पर कर दी गई। यदि आईआईटी रूड़की द्वारा तैयार किए जा रहे अंतिम नक्शे में वास्तविक सीमाएं और कब्जे अलग पाए जाते हैं तो महाजेंको को दी गई यह सीए भूमि प्रशासन और वन विभाग के लिए बड़ी कानूनी व प्रशासनिक चुनौती बन सकती है।

CA Land Scam: शिकायत के बाद सामने आए दस्तावेज

पीएमओ में की गई शिकायत और आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, नक्शाविहीन ग्राम नटवरपुर और चक्रधरपुर में आधा दर्जन से अधिक कंपनियों के नाम पर भूमि दर्ज थी। कई कंपनियों में इंद्रपाल सिंह भाटिया डायरेक्टर हैं, जबकि अन्य कंपनियों में अलग-अलग निदेशक होने के बावजूद पावर ऑफ अटॉर्नी इंद्रपाल सिंह भाटिया के नाम पर है। कई कंपनियों का पता भी एक ही बताया गया है, जिससे शेल कंपनियों के इस्तेमाल की आशंका और मजबूत होती है।

पूर्व में निलंबित कर्मचारी ने कराया अनुबंध

इस पूरे प्रकरण में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, पल्स ग्रुप द्वारा पूर्व में नक्शाविहीन ग्राम नटवरपुर में कराई गई जमीन खरीदी के दौरान उप पंजीयक की अनुपस्थिति में पंजीयन कराने के मामले में उप पंजीयन विभाग के तत्कालीन कर्मचारी एस.के. बेहरा को निलंबित किया गया था। बताया जा रहा है कि बाद में इन्हीं शेल कंपनियों और महाजेंको के बीच हुए भूमि अनुबंध के लिए स्टाम्प की खरीद एस.के. बेहरा के माध्यम से की गई, जबकि कई रजिस्ट्रियों में वे गवाह के रूप में भी दर्ज हैं।

राजस्व विभाग ने जारी की बिक्री नकल

आईआईटी रूड़की जहां अभी नटवरपुर में सैटेलाइट नक्शे के आधार पर सत्यापन कर रही है, वहीं चक्रधरपुर का प्रारंभिक नक्शा प्रकाशन के लिए तहसील कार्यालय भेजा गया है। नियमों के अनुसार पहले एसडीएम कार्यालय से प्रारंभिक प्रकाशन, फिर दावा-आपत्ति और उसके बाद कलेक्टर द्वारा अंतिम प्रकाशन होना है। इसके बावजूद राजस्व विभाग ने बिक्री नकल जारी कर जमीन की खरीद-बिक्री होने दी। वहीं वन विभाग ने भी अंतिम राजस्व नक्शे की प्रतीक्षा किए बिना डीजीपीएस सर्वे को आधार बनाकर भूमि का सीमांकन और कब्जा प्रक्रिया पूरी कर ली।

धरातल पर नहीं, कागजों में सक्रिय कंपनियां

जिन कंपनियों के नाम पर यह भूमि दर्ज थी, उनमें अधिकांश के बारे में दावा किया जा रहा है कि वे केवल भूमि खरीद-बिक्री के उद्देश्य से बनाई गई शेल कंपनियां हैं। इनका वास्तविक व्यावसायिक संचालन या गतिविधियां धरातल पर दिखाई नहीं देतीं।

शिकायत पर एक्शन मोड में महाराष्ट्र सरकार

इस मामले को लेकर पीएमओ में शिकायत की गई है। जिसमें बताया गया है कि नक्शाविहीन ग्राम में महाराष्ट्र पॉवर जनरेशन कंपनी के अधिकारियों ने 524 एकड़ भूमि क्रय कर क्षतिपूर्ति प्लांटेशन अर्थात सीए भूमि के लिए वन विभाग को सौंपा है। जिसमें भूमि से संबंधित दस्तावेज , मूल्यांकन, और स्वमित्व सत्यापन पर सवाल उठाया गया है। पीएमओ के शिकायत के बाद महाराष्ट्र सरकार ने महाराष्ट्र पॉवर जनरेशन से इस मामले में रिपोर्ट मांगी है।

कंपनी द्वारा प्रस्तावित भूमि के उपयोगिता की जांच करने के बाद राजस्व व अन्य विभाग से सहमति ली गई है। महाजेंकों द्वारा प्रदाय की गई सीए भूमि का डीजीपीएस सर्वे कराकर चिन्हांकन किया गया है। २१४ हेक्टेयर भूमि पजेशन में लिया गया गया है— अरविंद पीएम, डीएफओ वन मंडल रायगढ़

पहले लोग इस पहाड़ी को बंजर चट्टानों का ढेर समझते थे। आज जब यहां पक्षियों की आवाज सुनाई देती है, पेड़ों की छांव दिखती है और वन्यजीव लौटते नजर आते हैं, तो लगता है कि प्रकृति ने हमारे प्रयासों को स्वीकार कर लिया है। तापमान में भी कमी आई— डॉ. विजय कुमार शर्मा

किस कंपनी से कितनी भूमि खरीदी गई