Chakradhar function: इन दिनों रायगढ़ में चक्रधर समारोह का आयोजन किया गया है, इस अवसर पर देश-विदेश से कलाकार प्रस्तुति देने पहुंच रहे हैं। कार्यक्रम की प्रस्तुति देने पहुंची मालेबिका मंडल ने ये कहा...
रायगढ़. कलाकार अब बंदिशों से बाहर निकल रहे हैं। कलाकारों को जो अच्छा चाहिए उसे वे ले रहे हैं। हालांकि इसके लिए कलाकार को किसी एक घराने की बारिकी से अभ्यास जरुरी है। इसके बाद ही वे इस तरह के बदलाव ला रहे हैं। यह कहना है नई दिल्ली की शास्त्रीय गायिका मालेबिका मंडल का। वे चक्रधर समारोह (Chakradhar ceremony) की दूसरी शाम कार्यक्रम प्रस्तुत करने यहां पहुंची थी।
प्रेसवार्ता के दौरान शास्त्रीय गायिका मालेबिका मंडल का कहना था कि वे इस समारोह के बारे में काफी सुनी थी, लेकिन यहां आने का मौका नहीं मिल रहा था। इस समारोह में कार्यक्रम प्रस्तुत करने की काफी इच्छा थी, जो अब जाकर पूरी हुई। वहीं उन्होंने कहा कि गुरु-शिष्य की परंपरा आज भी कायम है। जब तक गुरु के प्रति शिष्य समर्पित नहीं होगा वह किसी भी कला में पारंगत नहीं हो सकता। हालांकि समय के साथ गुरु-शिष्य की परंपरा में कुछ बदलाव हुए हैं, जो आज के समय में आवश्यक भी है।
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उन्होंने बताया कि घर में उनके पिता को संगीत का शौक था। इसके अलावा इनके परिवार में किसी को भी संगीत का शौक नहीं था, लेकिन उन्हें बचपन से ही संगीत अच्छा लगता था। ऐसे में वे स्कूल के दिनों से ही संगीत सीखना शुरू कर दिया। शादी के बाद पति व बेटे ने भी काफी सपोट किया। इसकी वजह से उन्हें आज यह मुकाम हासिल हुआ है। वे देश के विभिन्न स्थानों में कार्यक्रम की प्रस्तुति देने के साथ विदेश में भी शास्त्रीय संगीत का कार्यक्रम प्रस्तुत कर चुकीं हैं।
कार्यक्रम के लिए छोड़ दी नौकरी
शास्त्रीय संगीत गायिका मंडल का कहना था कि वे एक स्कूल में संगीत शिक्षा की एचओडी थी। इसकी वजह से बाहर कार्यक्रम प्रस्तुत करने जाने में काफी समस्या होती थी। इस बात को लेकर आठ साल पहले ही उन्होंने स्कूल की नौकरी छोड़ दी। इसके बाद जहां भी उन्हें कार्यक्रम प्रस्तुत करने के लिए बुलाया जाता है वे जाती हैं।