रायगढ़

चंद्रहासिनी इस्पात की ईआईए पढ़कर लोट-पोट हो जाएंगे आप, लोगों ने कहा कि ये सर्वे है या मजाक, पढिए खबर

किसी कंपनी की इंवायरमेंटल इपेक्ट एसेसमेंट रिपोर्ट के बारे में यह माना जाता है कि ये विशेषज्ञों की ओर किया जाने वाला सर्वे या अध्ययन होता है

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Jan 11, 2018
किसी कंपनी की इंवायरमेंटल इपेक्ट एसेसमेंट रिपोर्ट के बारे में यह माना जाता है कि ये विशेषज्ञों की ओर किया जाने वाला सर्वे या अध्ययन होता है

रायगढ़. किसी कंपनी की ईआईए यानि कि इंवायरमेंटल इपेक्ट एसेसमेंट रिपोर्ट के बारे में यह माना जाता है कि ये विशेषज्ञों की ओर किया जाने वाला सर्वे या अध्ययन होता है जिसकी सभी बातें सही होती है और पर्यावरण मंत्रालय इस पर चर्चा करता है। पर आपका ये भ्रम उस वक्त दूर हो जाएगा जब एक कंपनी की ईआईए में केवल गलत और अनाप-शनाप जानकारी भरकर और इसी के दम पर जनसुनवाई तक करवा ली गई।

हैरानी की बात यह है कि इस ईआईए रिपोर्ट को न तो प्रशासन के लोगों ने पढ़ा और न ही पर्यावरण विभाग के अधिकारियों ने पढ़ा है। आईए जानते है कि इस इस ईआईए रिपोर्ट में कंपनी ने आखिर ऐसा क्या डाला है। ये मामला गेरवानी में स्थापित चंद्रहासिनी इस्पात के विस्तार का है। प्लांट के विस्तार अनुमति के लिए कंपनी ने गेरवानी के दस किलोमीटर के इलाके में सर्वे करवाया है। कंपनी का दावा है कि सर्वे का कार्य विशेषज्ञों की टीम ने किया है। इन हालात में जो भी जानकारी दी गई है वो अकाट्य है।

जब ईआईए का अध्ययन किया गया तो पाया गया कि इसमें भोंकने वाला हिरण, झारखंड की स्वर्णरेखा नदी रायगढ़ में और रायगढ़ जिले का गेरवानी को अब प्रदेश की राजधानी रायपुर में बता दिया गया है। इस तथ्य को जानकर कोई भी हैरान हो जाएगा। दरअसल ये जानकारी चंद्राहसिनी इस्पात के ईआईए रिपोर्ट में दी गई है। ऐसे में मंगलवार को आयोजित कंपनी की जनसुनवाई के दौरान आपत्तिकर्ताओं ने भी कंपनी की जानकारी का जमकर मजाक उड़ाया है।

विदित हो कि बंजारी में आयोजित इस जनसुनवाई का लोगों ने एक तरह से बहिष्कार कर दिया था। लोगों का गुस्सा इस बात को लेकर था कि कंपनी ने पहले तो ग्रामसभा से अनुमति नहीं ली है दूसरा बिना उनकी मर्जी के ऐसे स्थान का चयन जनसुनवाई के लिए किया गया जहां इनका पहुंचना मुश्किल था। इन हालात में कंपनी के प्रभावित गांव के लोग यहां पहुंचे ही नहीं।

जो लोग वहां पहुंचे थे उनका कहना था कि वहां पर अधिकांश वो लोग थे जो कंपनी में कार्य करते थे। और वो लोग ही वहां पर समर्थन-समर्थन के नारे लगाकर चले गए। वहीं जो लोग पर्यावरण संबंधी सवाल आदि को लेकर पहुंचे थे उन लोगों ने तो कंपनी के ईआईए को ही अब तक का सबसे बड़ा मजाक करार दे दिया है।


इन्हें नहीं चाहिए पानी- जनसुनवाई में आपत्ति दर्ज करवाने पहुंचे सविता रथ ने बताया कि कंपनी की ईआईए में स्पष्ट लिखा गया है कि इन्हें पानी की जरूरत नहीं है यानि की नदी के पानी की जरुरत नहीं है क्योंकि पास में ही केलो डैम बन गया है इसके कारण इस इलाके का जलस्तर काफी बढ़ा है ऐसे में वो अपने कंपनी का काम ग्राउंड वाटर से चला लेंगे।


ईआईए को बना दिया है मजाक- जनसुनवाई के दौरान कंपनी के विरोध के संबंध में नारेबाजी भी हुई, वहीं हैरान करने वाली बात यह है कि इसी इलाके में यानि कि इसी दस किलोमीटर के रेडियस में स्केनिया स्टील, तिरुमाला बालाजी और अब चंद्राहासनी इस्पात की जनसुनवाई हुई है इसके बाद भी इन तीनों कंपनी के ईआईए रिपोर्ट में समानता नहीं है, इनमें जमीन आसमान का फर्क है। सवाल यह उठता है कि जब इलाका एक है तो तीनों कंपनी की ईआईए में फर्क कैसे आ रहा है।

जाएंगे एनजीटी- इस मामले में जनसुनवाई में आपत्ति करने पहुंचे लोगों ने कहा कि इतनी लापरवाही, ईआईए में मजाक और गलत जानकारी के बाद भी यदि कंपनी को पर्यावरणीय स्वीकृति मिलती है तो इस मामले को एनजीटी में लगाया जाएगा।

Published on:
11 Jan 2018 07:40 pm
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