
रायगढ़. सुबह की गुलाबी ठंड के बीच 46 जवानों से भरी बस, उर्दना पुलिस लाइन से बंजारी जा रही थी। जिसकी सारी खिड़की व दरवाजें बंद थे।
जनसुनवाई के लिए जा रही इस पुलिस की बस को आरक्षक उदय सिंह चंद्रा चला रहा था। गेरवानी-लाखा मुख्य मार्ग के बीच अचानक उदय की नजर गेयर लीवर पर पड़ी। जहां चिंगारी के साथ आग की लपटे निकल रही थी। इस बीच उदय को यह समझते देर ना लगी कि किसी बड़ी अनहोनी की आशंका को भांपते हुए देर ना लगी और उसने बगैर देरी किए बस को साइड लगा कर उसमें बैठे जवानों को कूदने को कहा।
जब तक जवाब उदय की बात को समझते। तब तक आगे की लपटे उपर आ गई थी। जिसके बाद आनन-फानन में जवाब, खिड़की के कांच को तोड़ बाहर निकलने लगे। इस बीच 3 जवान को हल्की चोट भी आई है। फिर जवानों को दूसरी गाड़ी से जनसुनवाई के लिए पहुंचे।
मिली जानकारी के अनुसार 14 दिसंबर को तिरूमाला बालाजी एलॉयज प्रायवेट लि. पूंजीपथरा के द्वारा क्षमता विस्तार के तहत बंजारी मंदिर परिसर तराईमाल में निर्धारित पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए लोक सुनवाई कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। जिसमें कानून व्यवस्था को लेकर छ_ी वाहिनी विशेष सशस्त्र बल उर्दना से 46 जवान, पुलिस बस क्रमांक सीजी03 5119 से तराईमाल जा रहे थे। सुबह करीब 7.35 बजे उक्त बस गेरवानी व लाखा के करीब पहुंची थी।
जहां आरक्षक व बस चालक उदय सिंह चंद्रा की नजर लीवर गेयर पर पड़ी। जहां पहले धुंआ के साथ हल्की चिंगारी व आग निकल रहा था। जिसे देख उदय चौकस हो गया और बस को साइड कर तत्काल उसमें बैठे जवानों को बस से कूदने के लिए बोला।
अभी चंद मिनट बीते ही थे कि गेयर लीवर से आगे की लपटे उपर की ओर उठने लगी। जिसे देख जवानों के बीच भगदड़ की स्थिति हो गई। जल्दबाजी में मुख्यगेट का दरवाजा को खोलने की कोशिश की गई। पर वो लॉक होने की वजह से नहीं खुल।
जैसे-तैसे कांच तोड़ कर निकले जवान- जवानों ने पीछे की इमरजेंसी गेट व खिड़की के कांच को तोड़ कर जैसे-तैसे बाहर निकले। इस बीच 6वीं वाहिनी उर्दना में प्रशिक्षण ले रहे नव आरक्षक दिआरो बारसे, आशीष सिंगा, इकेश्वर सिन्हा को खरोंचे आई है।
देखते ही देखते पूरी बस जलकर खाक हो गई। बस में सवार जवानों की माने तो उदय ने समय पर अगर जवानों को साइड नहीं लगाया रहता और बस से कूदने को नहीं कहता तो सभी जवानों के साथ अनहोनी होना तय था। आनन-फानन में मामले की जानकारी पुलिस के आला अधिकारी को दी गई।
जिसमें बाद वो घटना स्थल पर पहुंच कर उक्त जवानों को दूसरे वाहन से जनसुनवाई के लिए भेजा। वहीं खरोंच लगने से घायल जवानों को उपचार कराने की पहल की गई।
हेलमेट, बॉडीगार्ड, शील्ड जलकर खाक- पुलिस के आला अधिकारियों ने बताया कि जनसुनवाई के दौरान कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए जवानों को हेलमेट, बॉडीगार्ड व अन्य सामान भी दिए गए थे। जो बस के साथ जलकर खाक हो गए। पुलिस की माने तो वर्ष 2013 माडल की ये बस, विभाग को 9 मई 2014 को मिली थी। चालक डायरी के अनुसार 13 दिसंबर 2017 तक उक्त बस ने 59 हजार 982 कि.मी का सफर पूरा कर लिया था। आगजनी की शिकार हुई इस बस पीयूसी (प्रदूषण नियंत्रित प्रमाण) संबंधी परीक्षण भी 29 नवंबर 2017 को कराया गया था।