Sirpur Mahasamund Chhattisgarh : छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के सिरपुर की ऐतिहासिकता को लेकर देश-विदेश में चर्चा होती है। राज्य सरकार, स्थानीय जागरुक नागरिक समूह और पुरातत्वविदों के प्रयास से इस संस्कृति और सभ्यता को संरक्षित किया जा रहा है। इस समय यहां कुछ स्थलों का उत्खनन चल रहा है। हाल ही में मिले मंदिर के ढांचे को 7वीं-8वीं शताब्दी का होने का अनुमान लगाया जा रहा है। हाल ही में अपने भेंट-मुलाकात कार्यक्रम सीएम भूपेश बघेल भी महासमुंद जिले के दौरे पर गए थे।
महासमुंद. सिरपुर (Sirpur Mahasamund ) में एक अन्य शिव मंदिर के अवशेषों का पता चला है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण व रायपुर के अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है। वर्तमान में खुदाई का दौर जारी है। और भी महत्वपूर्ण जानकारियां मंदिर के संबंध में मिल सकती हैं। डॉ. नित्या नंद एएसए और हेमंत मीणा, करबी साहा, एएसआई रायपुर सर्कल की देखरेख में वैज्ञानिक परीक्षण कर मंदिर को संरक्षित किया जा रहा है।
Sirpur Mahasamund Chhattisgarh : मंदिर 7वीं से 8वीं शताब्दी के आस-पास होने की जानकारी मिली है। इसमें टूटी हुई नंदी की प्रतिमा, शिव मंदिर की मूर्तियां और दीवार, नंदी का चबूतरा, मूर्तिकला के साथ दरवाजा, चौखट और मूर्तियों के टूटे हुए हिस्से साइट पर पाए गए हैं। इसके अलावा एक ही परिसर में एक टीला भी एएसआई द्वारा संरक्षित है। संरक्षण सहायक हेमंत मीणा ने बताया कि मंदिर के अवशेषों के संबंध में अभी कुछ भी विस्तृत रूप से नहीं कहा जा सकता है। ऐसा लग रहा है कि 7 वीं से 8 वीं शताब्दी के आस-पास के हों, लेकिन यह वैज्ञानिक परीक्षण के बाद ही ज्ञात होगा। जो स्थल मिले हैं, उसे संरक्षित करने के लिए प्रयास जारी हैं और भी महत्वपूर्ण जानकारियां मिल सकती हैं।
पूर्व में भी मिल चुके हैं शिव मंदिर
ऐसा नहीं है कि सिरपुर (Sirpur Mahasamund ) में खुदाई में मंदिर नहीं मिले हैं। पूर्व में भी शिव मंदिर, बौद्ध विहार व विष्णु मंदिर मिल चुके हैं। बताया जाता है कि भूकंप के कारण कई मंदिर जमीन के अंदर दब गए थे। जिसके कारण यहां शिवलिंग व मूर्तियों के अवशेष मिलते रहते हैं। वर्तमान में सिरपुर (Sirpur Mahasamund ) में संग्रहालय भी बना हुआ है। जहां प्राचीन मूर्तियाें का अवलोकन भी किया जा सकता है।
ये हैं सिरपुर में आकर्षण का केंद्र
Sirpur Mahasamund Chhattisgarh : सिरपुर महानदी (Sirpur Mahasamund ) के किनारे बसा है। यहां कई प्राचीन मंदिर हैं। वर्तमान में लक्ष्मण मंदिर को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। नए साल में पर्यटकों का उत्साह देखते ही बनता है। इसके अलावा सुरंग टीला भी आकर्षण का केंद्र रहता है। गंधेश्वर महादेव मंदिर में हर सावन में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। बौद्ध विहार और जैन विहार भी दर्शनीय है।