
Biraon Dussehra: रायपुर के बीरगांव दशहरा उत्सव समिति द्वारा आडवाणी स्कूल दशहरा मैदान में आयोजित भव्य विजयादशमी उत्सव इस वर्ष बेहद ऐतिहासिक और यादगार रहा। अपने गौरवशाली सफर के 21वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी समिति के इस भव्य आयोजन को देखने के लिए क्षेत्र के लगभग 25 हजार से अधिक परिवारों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रायपुर ग्रामीण के विधायक मोतीलाल साहू थे। पूरा आयोजन भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री (किसान मोर्चा) डॉ. ओमप्रकाश देवांगन के कुशल संरक्षण तथा समिति के अध्यक्ष एवं पार्षद बेदराम साहू की अध्यक्षता में पूरी भव्यता के साथ संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में उपस्थित विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि एवं विधायक मोतीलाल साहू ने अपने ओजस्वी भाषण में कहा कि विजयादशमी का पावन पर्व हमें याद दिलाता है कि अहंकार, अन्याय और अधर्म चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो जाए, उसका अंत निश्चित है। भगवान श्रीराम का जीवन हमें मर्यादा, धैर्य और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा, "बीरगांव की यह पावन धरा आज एकता और भक्ति के अनूठे रंग में रंगी हुई है। 21 वर्षों से इस गौरवशाली परंपरा को जीवित रखने के लिए डॉ. ओमप्रकाश देवांगन, अध्यक्ष बेदराम साहू और समिति की पूरी टीम बधाई की पात्र है, जिन्होंने क्षेत्र की जनता को एक सूत्र में पिरोने का यह ऐतिहासिक कार्य किया है।"
दशहरा उत्सव के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कार्यक्रम के संरक्षक डॉ. ओमप्रकाश देवांगन ने कहा कि यह दशहरा उत्सव अब सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि बीरगांव की एकता, अटूट संस्कृति और गौरवशाली परंपरा का प्रतीक बन चुका है।
डॉ. देवांगन ने बीरगांव की जनता को दशहरा एवं दीपावली की बधाई देते हुए सभी का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि पिछले 21 वर्षों से लगातार हो रहा यह आयोजन हमारी आने वाली पीढ़ी को संदेश देता है कि हमें अपने भीतर छिपी समस्त बुराइयों को समाप्त करना है। चाहे वह दोस्त हो या दुश्मन, गरीब हो या अमीर, कोई भी हो, जरूरतमंद हर व्यक्ति की हरसंभव मदद करनी चाहिए। समाज में असत्य चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, जीत हमेशा सत्य और धर्म की ही होती है।
समिति के संरक्षक एवज देवांगन ने भव्य आयोजन के लिए समिति के सदस्यों और क्षेत्रीय विधायक की तारीफ करते हुए कहा कि इस वर्ष बीरगांव के दशहरा उत्सव का मुख्य आकर्षण 81 फीट ऊंचे गगनचुंबी रावण के पुतले का दहन रहा। रावण दहन के दौरान मैदान रंग-बिरंगी और आकर्षक आतिशबाजी से गूंज उठा। सतरंगी रोशनी ने पूरे आसमान को सराबोर कर दिया।
आतिशबाजी के दौरान विशेष रूप से तैयार की गई 'सांप और नेवले की विकराल लड़ाई' के जीवंत आतिशबाजी दृश्य ने दर्शकों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया। यह रोमांचक नजारा देखने लायक था और लोगों ने इसका भरपूर आनंद लिया।
समिति के अध्यक्ष एवं पार्षद बेदराम साहू ने रिकॉर्ड भीड़ की सुरक्षा और व्यवस्थाओं के संबंध में बताया कि 25 हजार से अधिक परिवारों की भारी मौजूदगी को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा, बैठक व्यवस्था और सुचारू यातायात के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। समिति के सदस्यों ने सभी व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष प्रयास किए, जिससे पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से संपन्न हुआ। उन्होंने आयोजन में शामिल हुए सभी अतिथियों, क्षेत्रवासियों और समिति के सदस्यों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
समिति द्वारा दर्शकों के मनोरंजन और भक्तिभाव के लिए दोपहर से ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू कर दिया गया था। दोपहर 2 बजे से 'रंग झरना लोककला मंच, उरला' के संचालक राजू साहू और उनकी टीम द्वारा पारंपरिक छत्तीसगढ़ी जसगीत की बेहद मधुर प्रस्तुतियां दी गईं, जिसने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
इसके बाद शाम 4 बजे से 'अनुराग ग्रंथ श्रीराम लीला मंडली, उरकुरा' के कलाकारों द्वारा भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन पर आधारित भव्य रामलीला का मंचन किया गया, जिसे लोगों ने बेहद चाव से देखा। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे आयोजन को भक्तिमय और उत्साहपूर्ण बना दिया।
इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनने के लिए विशेष अतिथि के रूप में भाजपा के वरिष्ठ नेता एवज देवांगन, भीखम देवांगन, पार्षद राजेश देवांगन, पार्षद डॉ. मनमोहन मनहरे, एन.के.डी. हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. वेदप्रकाश देवांगन, टकेश देवांगन, पदमा चंद्राकर, फूलमणी सोनवानी, सुनीता वर्मा, कविता वर्मा, डेविड साहू, डॉ. संतोष साहू, नन्हू दीवान, योगेन्द्र वर्मा, चिंता वर्मा, डॉ. जांगड़े, पार्षद अश्वनी चांद्रे, रामअवतार देवांगन, सीताराम सिदार, नरसिंग निषाद, जितेन्द्र यादव तथा महालेश्वर महादेव मंदिर समिति के डॉ. सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
बीरगांव दशहरा उत्सव समिति के इस भव्य आयोजन में बड़ी संख्या में क्षेत्रवासियों की सहभागिता रही। 81 फीट ऊंचे रावण दहन, सतरंगी आतिशबाजी, छत्तीसगढ़ी जसगीत और भव्य रामलीला ने विजयादशमी उत्सव को यादगार बना दिया। 21 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा बीरगांव की धार्मिक आस्था, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है।