रायपुर

CG News: 250 साल पुरानी पान की खेती में आया नया ट्विस्ट, पत्तियों से बन रहे लड्डू, कुकीज और चाय, यहां 47 किस्मों का संग्रह

Betel Leaf Products: कभी बड़े पैमाने पर होने वाली इस पारंपरिक खेती में समय के साथ कमी आई, लेकिन अब पान की अलग-अलग किस्मों को संरक्षित करने के साथ ही पत्तियों से लड्डू, कुकीज, चाय और अन्य उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।
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Sep 19, 2026
Traditional Farming
पुंरानी पत्ती-नया उत्पाद (फोटो सोर्स- istock)

रायपुर@ताबीर हुसैन। Betel Leaf Farming: विवाह, पूजा-पाठ और शुभ अवसरों से लेकर खानपान तक पान छत्तीसगढ़ की संस्कृति का पुराना हिस्सा रहा है। प्रदेश के खैरागढ़-छुईखदान क्षेत्र में पान की खेती का इतिहास करीब 250 साल पुराना बताया जाता है। कभी यहां बड़े पैमाने पर होने वाली पान की खेती की पत्तियां मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, बनारस और नागपुर तक भेजी जाती थीं। समय के साथ बरेजा आधारित इस खेती में कमी आई और नई पीढ़ी इससे दूर होती गई। अब इसी पारंपरिक खेती को रिसर्च, नवाचार और नए उत्पादों के जरिए दोबारा खड़ा करने की कोशिश की जा रही है।

इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में साइंस कॉलेज ग्राउंड में लगे स्टॉल पर पान की अलग-अलग किस्मों और उनसे तैयार उत्पादों ने लोगों का ध्यान खींचा। पान रिसर्च से जुड़े डॉ. बीएस असाटी, रिसर्चर, पान अनुसंधान केंद्र छुईखदान ने बताया कि पारंपरिक पान की खेती को पुनर्जीवित करने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों का अध्ययन किया गया। पश्चिम बंगाल के कोलकाता, मिदनापुर, हावड़ा और दक्षिण 24 परगना क्षेत्र के अलावा उत्तरप्रदेश के महोबा, मध्यप्रदेश के छतरपुर और जबलपुर क्षेत्र से पान की विभिन्न किस्में एकत्र की गईं।

एक जगह 47 किस्मों का संग्रह

डॉ. असाटी के मुताबिक छुईखदान क्षेत्र में करीब 50 वर्षों से पान की खेती लगभग समाप्त हो गई थी। नई पीढ़ी के सामने इसकी खेती की जानकारी और अनुभव का अभाव था। इसी को देखते हुए किसानों और नई पीढ़ी को दूसरे राज्यों के पान उत्पादक क्षेत्रों का भ्रमण कराया गया। वहां से 47 प्रकार के पान लाकर छुईखदान में लगाए गए। इनमें देसी पान, देसबारी, महोबिया, छत्रपति, कटक, बंगला, मीठा, कपूर और बिलौरी जैसी किस्में शामिल हैं।

पत्ते से आगे बढ़ा कारोबार

पान की खेती को केवल पत्तियों की बिक्री तक सीमित रखने के बजाय उससे जुड़े नए उत्पाद विकसित किए जा रहे हैं। पान लड्डू, पान रिफ्रेश, चॉकलेट फ्लेवर, कुकीज और पान चाय जैसे उत्पाद तैयार किए गए हैं। इसके लिए महिला समूहों को भी जोड़ा गया है। जिला प्रशासन के सहयोग से क्षेत्र में पांच दुकानों की शुरुआत की गई है, जहां इन उत्पादों की बिक्री की जा रही है।

छुईखदान में खुलेगा पान कैफे

डॉ. असाटी के अनुसार पान की खेती को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छुईखदान में पान कैफे की घोषणा भी की थी, जिस पर काम चल रहा है। पान की खेती में पत्तियों की नियमित बिक्री के कारण किसानों के लिए नकद आय की संभावना रहती है। लंबे समय से बंद पड़ी खेती को दोबारा शुरू करने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। अब क्षेत्र में करीब 10 किसान पान की खेती के लिए तैयार हुए हैं।

Updated on:
19 Sept 2026 06:55 pm
Published on:
19 Sept 2026 05:20 pm