रायपुर

Guest Editor: 72 लोगों ने छोड़ी शराब, हरियाली से गांव की बदली सूरत

Guest Editor: सोच- समाज में बदलाव की पहल अपने बीच से ही करनी होती है। लोग आगे आने लगते हैं तो वह बड़े आंदोलन का रूप ले लेती है।
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Updated: 7 Nov 2026, 6:19 PM IST
Guest Editor

Guest Editor: छह लोगों ने शराब छोड़ने का संकल्प लिया था। तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यह छोटी-सी पहल एक दिन 14 गांवों तक बदलाव की रोशनी पहुंचाएगी। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना ब्लॉक के बरडीह गांव में आज नशामुक्ति की ऐसी ही मिसाल देखने को मिल रही है।

यहां कभी शराब की लत से जूझने वाले लोग अब दूसरों को नशे से बाहर निकालने में मदद कर रहे हैं। सामूहिक प्रयासों से अब तक 72 लोग शराब छोड़ चुके हैं और कई परिवारों में खुशियां लौट आई हैं। इस बदलाव की शुरुआत 26 साल पहले आदर्शवादी सेवा समिति ने की थी।

समिति के संयोजक दुखनाशन प्रधान बताते हैं कि शुरुआत में अवैध शराब पकड़वाने का प्रयास किया जाता था, लेकिन बाद में महसूस हुआ कि केवल शराब की बिक्री रोकने से समस्या खत्म नहीं होगी। इसके लिए नशे की गिरफ्त में आए लोगों को सहारा देना जरूरी है। समिति ने 6 लोगों को शराब छोड़ने में मदद की। बाद में यही लोग दूसरों के लिए प्रेरणा बने और अभियान 14 गांवों तक पहुंच गया।

बच्चों को भी कर रहे जागरूक: समिति ने नई पीढ़ी को नशे से बचाने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में नशामुक्ति परीक्षा शुरू की है। इसमें विद्यार्थियों से नशे के दुष्परिणामों से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। बेहतर प्रदर्शन करने वालों को सम्मानित भी किया जाता है। महिलाओं का सहयोग भी अभियान को मजबूती दे रहा है।

हरियाली से भी बनी अलग पहचान:बरडीह ने नशामुक्ति के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी अपनी जिम्मेदारी बनाया है। वर्ष 2020 में ग्राम पंचायत ने सड़क किनारे छायादार पौधे लगाने की शुरुआत की। इसके बाद समिति ने अभियान को आगे बढ़ाया। पिछले चार वर्षों से सड़कों और तालाबों के किनारे अशोक, पाम और कदम के पौधे लगाए जा रहे हैं। उनकी नियमित देखभाल भी की जा रही है। आज पेड़ों की कतारें और तालाबों के आसपास फैली हरियाली गांव की खूबसूरती बढ़ा रही है। राहगीर भी इस नजारे को देखकर रुकते हैं और तस्वीरें लेते हैं। बरडीह ने साबित किया है कि सामूहिक संकल्प से नशामुक्त समाज और हरित गांव, दोनों का सपना साकार हो सकता है।