दो बड़ी क्रासिंग पर करोड़ों रुपए की लागत से बन रहे ओवरब्रिज हजारों लोगों के लिए जी का जंजाल बन गया है
रायपुर . राजधानी में रेलवे की दो बड़ी क्रासिंग पर करोड़ों रुपए की लागत से बन रहे ओवरब्रिज हजारों लोगों के लिए जी का जंजाल बन गया है। जिस निर्माण को 18 महीने में पूरा करना था, वह तीन साल बाद भी पूरा होने का नाम नहीं ले रहा है।
हैरानी की बात यह है कि ब्रिज के ट्रैक वाले हिस्से में गर्डर चढ़ाने को लेकर रेलवे और पीडब्ल्यूडी में खींचतान चल रही है। निर्माण में तेजी का आलम यह है कि इन दोनों आरओबी के लिए अभी तक गर्डर ही तैयार नहीं हो पाया है। जबकि ट्रैक के दोनों तरफ ब्रिज बनकर तैयार है।
शहर के इन दोनों रेलवे क्रासिंग पर लोक निर्माण विभाग ब्रिज जोन ने 18 महीने में निर्माण कराने का टेंडर 2015 में जारी किया था, लेकिन आज तक हजारों लोगों को हर दिन क्रासिंग पार करना पड़ रहा है। आरओबी के अधूरे निर्माण के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इन दोनों रेलवे क्रासिंग से हर दिन हजारों लोगों का आना-जाना होता है। फाटक बंद होने की स्थिति में जहां लंबी कतारें दोनों तरफ लग जाती हैं, वहीं लोग जान-जोखिम में डालकर तब तक फाटक पार करते रहते हैं, जब कि ट्रेन सामने दिखाई न दे। एेसे में हर दिन खतरा मंडराता रहता है।
२०-२० करोड़ का निर्माण अधर में : पीडब्ल्यूडी ब्रिज जोन शंकर नगर और मालगाड़ी रेलवे लाइन पर कोटा-गोंदवारा रोड को जोड़ते हुए आरआेबी का निर्माण 20-20 करोड़ की लागत से करा रहा है। लेकिन निर्माण मनमानी तरीके से चल रहा है। समय-सीमा निर्माण स्थल पर ताक पर नजर आती है। रेलवे और पीडब्ल्यूडी में भी तालमेल का अभाव साफतौर पर दिखाई देता है। रेल अफसरों का तर्क है कि निर्माण कराने की पूरी जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी की ही है। रेलवे केवल गर्डर लॉचिंग के समय ब्लॉक लेने का समय तय करेगा। लेकिन अभी तक गर्डर ही शंकर नगर आरओबी के लिए तैयार नहीं है। इस वजह से देरी हो रही है।
शहर की यह दोनों रेलवे क्रासिंग पर आवाजाही का ट्रैफिक सवा लाख से अधिक पहुंच चुका है। गोगांव क्रासिंग से होकर जहां हर 15 से 20 मिनट में मालगाडि़यों की आवाजाही होती है तो शंकर नगर रेलवे क्रासिंग से दर्जनभर से अधिक यात्री ट्रेनों के अलावा ओडिशा रूट की तरफ से मालगाड़ी का भी परिचालन होता है। इसके बावजूद निर्माण की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
रायपुर मंडल के डीआरएम कौशल किशोर ने कहा कि रेलवे के तरफ से कोई दिक्कत नहीं है। पीडब्ल्यूडी का ही गर्डर तैयार नहीं है। रेलवे 4 से 5 घंटे का ब्लॉक लेकर गर्डर लॉचिंग में पूरी मदद करेगा।
पीडब्ल्यूडी ब्रिज अधीक्षण अभियंता जीपी पंवार ने कहा कि रेलवे के दायरे वाले हिस्से में देरी की मुख्य वजह रेलवे है। इसलिए निर्माण पूरा होने में विलंब हो रहा है। दोनों क्रासिंग एप्रोच आरओवी का निर्माण पूरा हो चुका है। गर्डर चढ़ाने में अभी काफी समय लगेगा।