रायपुर

एआई से अब पलक झपकते होगी धान के क्वालिटी की जांच, 360 डिग्री स्कैनिंग से हर दाने की गुणवत्ता का डिजिटल विश्लेषण

Bhiali b News ews :एआई आधारित 360 डिग्री ऑटोमेटिक असेइंग मशीन विकसित की है, जो कुछ ही मिनटों में हर दाने का सूक्ष्म विश्लेषण कर विस्तृत डिजिटल रिपोर्ट उपलब्ध कराती है।

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Feb 22, 2026
182 केंद्रों में धान खरीदी के लिए टोकन जारी (Photo Patrika)

भिलाई । छत्तीसगढ़ समेत देशभर में धान और अन्य अनाज की गुणवत्ता जांच अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़ने जा रही है। भिलाई की डीप-टेक कंपनी क्वाल आई टेक्नोलॉजी ने एआई आधारित 360 डिग्री ऑटोमेटिक असेइंग मशीन विकसित की है, जो कुछ ही मिनटों में हर दाने का सूक्ष्म विश्लेषण कर विस्तृत डिजिटल रिपोर्ट उपलब्ध कराती है। कंपनी का दावा है कि यह तकनीक गुणवत्ता परीक्षण को तेज, पारदर्शी और पूरी तरह वैज्ञानिक बनाएगी।

दानों की पहचान के लिए प्रशिक्षित कियाइस मशीन में लगे हाई-रेजोल्यूशन कैमरे सैंपल के प्रत्येक दाने की 360 डिग्री तस्वीर लेते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित सॉफ्टवेयर इन तस्वीरों की तुलना पहले से फीड किए गए हजारों नमूनों के डेटा से करता है। सिस्टम को अच्छे, टूटे, खराब और अधिक नमी वाले दानों की पहचान के लिए प्रशिक्षित किया गया है।

जांच पूरी होते ही मशीन टूटे दानों का प्रतिशत, खराब दानों की संख्या, कचरे की मात्रा और नमी स्तर जैसी पूरी जानकारी डिजिटल रिपोर्ट के रूप में स्क्रीन पर दिखा देती है। पूरी प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाती है।गुणवत्ता जांच मैन्युअली हो रहीवर्तमान में अधिकांश खरीदी केंद्रों पर गुणवत्ता जांच मैन्युअल तरीके से होती है।

कर्मचारी सैंपल देखकर अनुमान लगाते हैं और नमी अलग उपकरण से मापी जाती है। इससे समय अधिक लगता है और परिणामों में एकरूपता नहीं रहती, कई बार विवाद की स्थिति भी बन जाती है। एआई आधारित यह मशीन मानवीय त्रुटि को काफी हद तक खत्म कर हर बार समान मानकों पर जांच संभव बनाती है।

किसानों को ज्यादा इंतजार नहीं करना होगाइस तकनीक के लागू होने से किसानों को लंबे इंतजार से राहत मिलेगी और उन्हें स्पष्ट डिजिटल रिपोर्ट प्राप्त होगी। मंडियों, मिलर्स और व्यापारियों को भी गुणवत्ता की सटीक जानकारी मिलेगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात के लिए, जहां वैज्ञानिक और प्रमाणित जांच अनिवार्य है, यह तकनीक खास तौर पर उपयोगी हो सकती है।

एफसीआई के साथ पायलट पहलकंपनी के अनुसार मशीन को दो वर्ष के शोध और विकास के बाद तैयार किया गया है। तकनीकी टीम में सौरभ श्रीवास्तव, पुष्कर वर्मा, कृष्णा राठी, कमल देवकी और शिवा शामिल रहे। मशीन का पेटेंट प्रकाशित हो चुका है और विभिन्न सरकारी व निजी संस्थानों के साथ इसे लागू करने की दिशा में चर्चा जारी है।

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