पूर्व मुख्यमंत्री व जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के संस्थापक अजीत जोगी ने शुक्रवार को दिल्ली में अपनी राजनीतिक ताकत दिखाई।
रायपुर. पूर्व मुख्यमंत्री व जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के संस्थापक अजीत जोगी ने शुक्रवार को दिल्ली में अपनी राजनीतिक ताकत दिखाई। जोगी ने अपने कोर कमेटी के सदस्यों और कार्यकर्ताओं के साथ मौन जुलूस निकाला। लेकिन प्रधानमंत्री आवास पहुंचने से पहले ही बड़ी संख्या में तैनात सुरक्षा बलों ने जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) प्रमुख अजीत जोगी सहित पार्टी के 500 से अधिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।
इस दौरान पांच प्रतिनिधियों को प्रधानमंत्री आवास के अंदर जाने की अनुमति प्रदान की गई, जहां जोगी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम सूत्रीय मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। इस दौरान अजीत जोगी के साथ उनके बेटे और विधायक अमित जोगी, धर्मजीत सिंह, देवरत सिंह, अनिल टाह, रामलाल भारद्वाज, ओम प्रकाश देवांगन, प्रमोद शर्मा, नितिन भंसाली, समीर एहमद बबला, अमर गिदवानी, सुनंद विश्वाश सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद थे।
पार्टी प्रवक्ता नितिन भंसाली ने बताया कि इससे पहले अजीत जोगी के नेतृत्व में भारत निर्वाचन आयोग के कार्यालय पहुंचकर चुनाव चिह्न आवंटन करने के लिए ज्ञापन सौंपा गया। इसके बाद अजीत जोगी के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री आवास की ओर कूच किया। मालूम हो कि जोगी के स्वास्थ्य होने के बाद यह उनका पहला आंदोलन होगा।
इधर, बसपा सुप्रीमो मायावती से हुई मुलाकात के बाद प्रवक्ता संजीव अग्रवाल ने एक बयान जारी कर जनता कांग्रेस और बसपा के बीच गठबंधन की खबरों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि जोगी और मायावती ने करीब डेढ़ घंटे तक राष्ट्रहित और प्रदेश हित के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की थी।
जोगी ने भी इस मिटिंग की पुष्टि करते हुए इसे सौजन्य मुलाकात बताया था। अग्रवाल ने कहा, इस मुलाकात की खबर को कुछ लोग राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं, जो पूरी तरह निराधर है। पार्टी ने पहले ही इस बात की घोषणा कर दी है कि जनता कांग्रेस प्रदेश की सभी 90 विधानसभा सीट पर चुनाव लड़ेगी।