
Pateghat Temple: महाराष्ट्र के भंडारा जिले में पवनी स्थित वैन गंगा नदी के किनारे पाटेघाट के श्री राम मंदिर में जीर्णोद्धार का प्रथम चरण शुरू हो गया है। श्री दूधाधारी मठ रायपुर से संबंधित इस मंदिर की नींव खुदाई के दौरान प्राचीन सभ्यता के कुछ अवशेष प्राप्त हुए हैं, जिनमें पाषाण निर्मित सिंहासन प्रमुख है।
अवशेष प्राप्त होने पर राजेश्री महन्त रामसुन्दर दास ने कहा कि यह पत्थर से निर्मित देवी-देवताओं के सिंहासन हो सकते हैं अथवा महात्माओं के चंदन घिसने में काम आने वाली कोई वस्तु भी हो सकती है। यह पूर्णतया पत्थर से निर्मित है, जो पाषाणकालीन सभ्यता का प्रतीत होता है। उन्होंने इसके ऐतिहासिक महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह प्राचीन सभ्यताओं के विकास की ओर ध्यान आकर्षित करता है और इसकी सही जानकारी इतिहासकार ही बता सकते हैं।
मीडिया प्रभारी निर्मल दास वैष्णव ने बताया कि यह कायांतरित (रूपांतरित) चट्टानों से बना है, जिसका निर्माण आग्नेय या अवसादी चट्टानों के अत्यधिक ताप या दाब की भूगर्भीय प्रक्रियाओं से होता है। उन्होंने सिंधु घाटी सभ्यता से तुलना करते हुए कहा कि यह अत्यंत प्राचीन स्थल है और वैन नदी घाटी में भी कोई सभ्यता छिपी हो सकती है। अवशेष में स्वास्तिक चिन्ह अंकित है, जिसका सनातन धर्म में अत्यधिक महत्व है।
उल्लेखनीय है कि पवनी, महाराष्ट्र में स्वामी गरीबदास की तपोभूमि श्री राम मंदिर के रूप में स्थित है, जिसके जीर्णोद्धार का कार्य प्रारंभ हो चुका है। इसी के अवलोकन के लिए महन्त अपने सहयोगियों सहित 30 जून को यहां गए थे। इस अवसर पर उनके साथ हर्ष दुबे, राजीव लोचन त्रिपाठी, जनक राम साहू और सुरक्षा अधिकारी अनिल पांडे उपस्थित थे।
महंत रामसुंदर दास के अनुसार, प्राप्त अवशेष पूर्णतः पत्थर से निर्मित हैं और उनकी बनावट अत्यंत प्राचीन प्रतीत होती है। इस कारण इन्हें संभावित रूप से प्राचीन या पाषाणकालीन परंपरा से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, किसी भी कालखंड की आधिकारिक पुष्टि पुरातात्विक अध्ययन के बिना नहीं की जा सकती।
यदि इन अवशेषों का वैज्ञानिक और पुरातात्विक परीक्षण कराया जाता है, तो यह खोज पवनी क्षेत्र के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर नई रोशनी डाल सकती है तथा वैनगंगा घाटी की प्राचीन सभ्यता और धार्मिक परंपराओं से जुड़े नए तथ्य सामने आ सकते हैं।