Toll Free Number Issue: सरकारी हेल्पलाइन और टोल फ्री नंबरों में से चाइल्ड हेल्पलाइन, पुलिस पेट्रोङ्क्षलग और आरोग्य सेवा को छोड़ दें, तो बाकी के हाल बेहाल हैं। कुछ नंबरों की घंटियां तो बजती हैं, लेकिन उठाने वाला कोई नहीं।
Toll Free Number Issue: आम लोगों की त्वरित सहायता और परामर्श के लिए जारी सरकारी हेल्पलाइन और टोल फ्री नंबरों में से चाइल्ड हेल्पलाइन, पुलिस पेट्रोङ्क्षलग और आरोग्य सेवा को छोड़ दें, तो बाकी के हाल बेहाल हैं। कुछ नंबरों की घंटियां तो बजती हैं, लेकिन उठाने वाला कोई नहीं। कुछ नंबर अमान्य बताए जा रहे हैं, तो कुछ ऐसे भी हैं, जिन्हें डायल करते ही कॉल डिस्कनेक्ट हो जा रहा है।
‘पत्रिका’ ने इन नंबरों पर दी जा रही सेवाओं की सच्चाई जानने 4 अप्रैल को कॉल किया तो चौंकाने वाले वाकये सामने आए। कुछ ऐसे भी नंबर हैं, जिन पर मौजूद कर्मचारियों ने तत्परता से कॉल उठाया और समस्या जाननी चाही।
किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगे बोर्ड पर यह हेल्पलाइन नंबर 1033 बड़े बड़े अक्षरों में लिखे हुए दिख जाएंगे। इस नंबर पर कॉल करके आम नागरिक नेशनल हाइवे में किसी भी दुर्घटना या अन्य कोई परेशानी होने पर कॉल कर सकते हैं। पत्रिका ने इस नंबर पर दोपहर 03.05 बजे कॉल किया। आश्चर्यजनक रूप से जवाब मिला कि आपके द्वारा डायल किया गया नंबर अमान्य है।
भारत निर्वाचन आयोग और राज्यों के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों द्वारा जारी किए गए इस टोल फ्री नंबर पर कॉल करके नागरिक वोटर लिस्ट, मतदान, अथवा आगामी चुनाव संबंधी जानकारी या परामर्श ले सकते हैं। पत्रिका ने इस नंबर पर 03.03 बजे कॉल किया। नंबर डायल करके जैसे ही कॉल किया गया, कॉल एंड बताने लगा। दो बार, तीन बार कॉल करने पर ऐसा ही होता रहा।
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संचालित 102 महतारी एक्सप्रेस गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए एक निशुल्क एम्बुलेंस सेवा है, जिसके सात दिन 24 घंटे उपलब्धता का दावा है। यह घर से अस्पताल और अस्पताल से घर तक छोडऩे की निशुल्क सेवा है। पत्रिका ने इस नंबर पर दोपहर 02.49 बजे कॉल किया। पूरी घंटी जाने के बावजूद किसी ने नहीं उठाया।
रायपुर संभाग आयुक्त एमडी कावरे ने कहा की ऐसा नहीं है कि सारे नंबरों पर समस्या है। 112 और 108 जैसी सुविधाएं आज लोगों को बहुत राहत दे रही हैं। कुछ नंबर व्यस्त हो सकते हैं, क्योंकि प्रदेशभर से कॉल आते रहते हैं। कुछ नंबर पुराने हो सकते हैं, जो बाद में अपडेट नहीं हुए होंगे। वैसे इन्हें अलग-अलग विभाग मॉनीटर करते हैं।