रायपुर

Good News: ब्लड कैंसर समेत अन्य रक्त बीमारियों से जूझ रहे बच्चों का अब रायपुर AIIMS में होगा उपचार, बोन मैरो ट्रांसप्लांट शुरू

Raipur AIIMS News: सिकलसेल, थैलेसीमिया, ब्लड कैंसर तथा अन्य गंभीर रक्त संबंधी बीमारियों से जूझ रहे बच्चों को अब बाहर जाने की जरूरत नहीं। रायपुर एम्स में बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू हो गई है..
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Jul 10, 2026
Chhattisgarh news
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, रायपुर ( File Photo - Patrika )

Chhattisgarh AIIMS News: एम्स रायपुर में जल्द ही बच्चों के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू होगी। इससे सिकलसेल, थैलेसीमिया, ब्लड कैंसर तथा अन्य गंभीर रक्त संबंधी बीमारियों से पीड़ित बच्चों को प्रदेश में ही अत्याधुनिक उपचार मिल सकेगा। गुरुवार को एम्स प्रबंधन और बाल आयुष फाउंडेशन के बीच बीएमटी सेंटर की स्थापना के लिए पांच वर्ष की अवधि का समझौता ज्ञापन (एमओयू) हस्ताक्षरित किया गया। एम्स रायपुर में स्थापित होने वाला यह केंद्र छत्तीसगढ़ का पहला उन्नत सरकारी बोन मैरो ट्रांसप्लांट सेंटर होगा।

Raipur AIIMS: जेनेटिक एवं रक्त संबंधी कई गंभीर का होगा उपचार

विशेषज्ञों के अनुसार जेनेटिक एवं रक्त संबंधी कई गंभीर बीमारियों में बोन मैरो ट्रांसप्लांट सबसे प्रभावी और अनेक मामलों में स्थायी उपचार माना जाता है। अब तक इस सुविधा के अभाव में मरीजों को मुंबई, दिल्ली और अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। वर्तमान में प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है, जबकि दो निजी कैंसर अस्पतालों में सीमित स्तर पर बीएमटी किया जा रहा है।

बच्चों को मिलेगा जीवनरक्षक उपचार

समझौता ज्ञापन पर एम्स रायपुर के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ. अशोक जिंदल, बाल आयुष फाउंडेशन के संस्थापक एवं निदेशक ललित परमार, मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. डीके त्रिपाठी तथा थैलेसीमिक्स इंडिया के संस्थापक अध्यक्ष दीपक चोपड़ा ने हस्ताक्षर किए। डॉ. जिंदल ने इसे ऐतिहासिक पहल बताते हुए कहा कि इससे बाल कैंसर एवं गंभीर रक्त रोगों से पीड़ित जरूरतमंद बच्चों को निःशुल्क और जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध कराने का मार्ग प्रशस्त होगा।

एम्स देगा चिकित्सा विशेषज्ञता, फाउंडेशन जुटाएगा संसाधन

पांच वर्ष के इस समझौते के तहत एम्स आवश्यक स्थान, चिकित्सा विशेषज्ञता और प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराएगा। वहीं बाल आयुष फाउंडेशन कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर), गैर-सरकारी संस्थाओं तथा विभिन्न सरकारी अनुदानों के माध्यम से सेंटर की स्थापना और आवश्यक उपकरणों की व्यवस्था करेगा। यह केंद्र एम्स के चिकित्सा लाइसेंस के अंतर्गत संचालित होगा और इसकी चिकित्सा सेवाओं का नेतृत्व पीडियाट्रिक हीमैटो-ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. सुनील जोंधले करेंगे। कार्यक्रम में पीडियाट्रिक विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार गोयल सहित कई वरिष्ठ चिकित्सक उपस्थित रहे।

जाति विशेष में अधिक सिकलसेल

प्रदेश में रायपुर, नारायणपुर, महासमुंद, धमतरी, राजनांदगांव, दुर्ग, गरियाबंद, जांजगीर-चांपा, बालोद और बलौदाबाजार सहित 10 जिले सिकलसेल से सर्वाधिक प्रभावित हैं। नेहरू मेडिकल कॉलेज परिसर में सिकलसेल एक्सीलेंस सेंटर का निर्माण जारी है, जहां भविष्य में बीएमटी सुविधा शुरू करने की भी योजना है। वर्तमान में सिकलसेल संस्थान में जांच और उपचार निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।

Updated on:
10 Jul 2026 11:34 am
Published on:
10 Jul 2026 11:33 am