रायपुर

इस रिटायर्ड अफसर के जज्बे को सुनकर आप भी करेंगे सलाम, 1971 के युद्ध में दुश्मनों को चटाई थी धूल

१९७१ में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध में पैर गंवाने वाले रिटायर्ड अफसर जंग शमशेर सिंह कक्कड़ के जज्बे को सुनकर आप भी करेंगे सलाम।
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Updated: 27 Jan 2018, 11:47 AM IST
Brave Heroes

अजय रघुवंशी/रायपुर. राजधानी के लालपुर निवासी जंग शमशेर सिंह कक्कड़ ने भारत-पाकिस्तान युद्ध में कारगर भूमिका निभाई। 1971 के युद्ध के दौरान सुरंग विस्फोट में अपना एक पैर भी गंवा दिया। बावजूद इसके कर्नल ने आर्मी की नौकरी नहीं छोड़ी।

रिटायरमेंट के बाद कर्नल आज भी समाजसेवा कर अपना योगदान दे रहे हैं। चाहे वह बच्चों में व्यक्तित्व विकास का प्रशिक्षण हो या कॉलेज-स्कूलों में रक्षा विषयों पर सेमिनार। वे कैडेट्स को फायरिंग से लेकर स्वीमिंग और अन्य गतिविधियों का नि:शुल्क प्रशिक्षण देते हैं। कर्नल कक्कड़ ने पत्रिका से बातचीत में अपना अनुभव साझा किया।

20 साल से युवाओं को दे रहे प्रशिक्षण
रिटायरमेंट के बाद कर्नल रायपुर शिफ्ट हुए। इसके बाद वे अपना अनुभव स्कूल, कॉलेज, एनसीसी कैंप, सामाजिक कार्यो में देते रहे। सरकारी कार्यक्रमों में कर्नल कक्कड़ को उनके इस उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि वे किसी भी राजनीतिक पार्टी से लगाव नहीं रखते, लेकिन देश के लिए बेहतर कार्य करने वाले लोगों का समर्थन करते हैं।

'पैर गंवाया है-शरीर नहीं' से मिली जीत
कर्नल शमशेर सिंह बहादुर को सेकंड लेफ्टिनेंट पद पर कमीशन मिला। सन् 1971 (भारत-पाक युद्ध) की लड़ाई के दौरान कर्नल अपनी टीम के साथ आगे बढ़ रहे थे। तभी उनका पैर बारूदी सुरंग के नीचे आ गया। जोरदार धमाके के साथ बाएं पैर के चिथड़े उड़ गए। इसके बाद भी कर्नल ने हिम्मत नहीं हारी और अपनी टीम को लक्ष्य तक पहुंचाया। इस घटना के बाद उनके पास आर्मी से सेवानिवृत्त होने का विकल्प था, लेकिन पिता की हौसला अफजाई के बाद उन्होंने 20 साल तक और नौकरी की। इस दरमियान कर्नल ने कई युद्ध क्षेत्र में अपनी सेवाएं दी। शुरूआत में उन्हें लकड़ी के पैर से काम चलाना पड़ा। मेजर पिता की कही हुई बात कर्नल को आज भी याद है। उनके पिता ने कहा था कि सिर्फ पैर ही गंवाया है, पूरा शरीर नहीं। जब तक जान बची है तब तक देश की सेवा करते रहो।

देश के लिए योगदान जरूर करें
गणतंत्र दिवस पर युवाओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि गंदी राजनीति से आज समाज में मतभेद है। युवाओं को चाहिए कि वह ऐसे राजनेता जो समाज और देश की फिक्र नहीं करते हैं, उनका साथ न दे। युवाओं को एक अच्छे उद्देश्य के साथ राजनीति में आना चाहिए। वह जहां भी रहे देश के लिए कुछ न कुछ योगदान जरूर दें। यदि देश के भीतर सभी समाज, धर्म और संप्रदाय के लोग एकजुट हो जाए तो वह दिन दूर नहीं जब अमेरिका, चाइना जैसे देश हमारे सामने घुटने टेक देंगे।

Updated on:
27 Jan 2018, 11:47 AM IST
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