AI Impact on Jobs: कंपनियां अब बड़ी टीम की बजाय कम लेकिन अधिक स्किल्ड कर्मचारियों को प्राथमिकता दे रही हैं, जिसके चलते पहले जहां 15-20 छात्रों को जॉब मिलती थी, अब यह संख्या घटकर 4-5 तक रह गई है।
AI Impact on Jobs: छत्तीसगढ़ के रायपुर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने नौकरी के बाजार की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। कंपनियां अब बड़े वर्कफोर्स की बजाय छोटी और स्किल्ड टीम पर भरोसा कर रही हैं। हालात ऐसे बन रहे हैं कि एक कंपनी जहां पहले टेक्निकल एक्सपर्ट में 15-20 छात्रों की भर्ती करते थे, अब वो आंकड़ा सिमटकर 4-5 छात्रों पर आ गई है।
कंपनियों द्वारा कम लोग और एआई टूल्स की मदद से पूरा किया जा रहा है। इसका सीधा असर नए पासआउट छात्रों यानी फ्रेशर्स पर पड़ रहा है। राजधानी स्थित टेक्निकल इंस्टिट्यूट के प्लेसमेंट प्रोसेस में भी यह असर साफ दिखाई दे रहा है।
प्लेसमेंट प्रोफेशनल्स के अनुसार, रायपुर से हर साल सैकड़ों छात्र आईटी, मैनेजमेंट और इंजीनियङ्क्षरग की पढ़ाई पूरी कर नौकरी की तलाश में निकलते हैं। प्लेसमेंट एक्सपट््र्स के अनुसार, इस साल कई कॉलेजों में प्लेसमेंट की संख्या में गिरावट देखी गई है। खासतौर पर आईटी सेक्टर में कंपनियों ने ऑफर लेटर कम जारी कर रहे हैं।
आईटी और सर्विस सेक्टर की कई कंपनियों ने अपनी हायङ्क्षरग रणनीति बदल दी है। एआई टूल्स के जरिए कोङ्क्षडग, डेटा एनालिसिस, कंटेंट राइङ्क्षटग और कस्टमर सपोर्ट जैसे काम तेजी से और कम लागत में किए जा रहे हैं। इसके चलते कंपनियां अब कम कर्मचारियों में ज्यादा आउटपुट ले पा रही हैं।
इसके साथ ही इंटरव्यू के समय भी एआई से प्रोग्राम लिखाकर स्टूडेंट्स को उसे और बेहतर करने का टास्क दिया जा रहा है। इससे कंपनियां छात्रों की एआई स्किल देख रहे हैं। उसके बाद ही उन्हें जॉब ऑफर लेटर दिया जा रहा है।
एक्सपर्ट के अनुसार, नए ग्रेजुएट्स के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि कंपनियां अब ट्रेंड और रेडी कैंडिडेट चाहती हैं। पहले जहां कंपनियां टेंडर देकर फ्रेशर्स को तैयार करती थीं, अब यह चलन कम होता जा रहा है। एंट्री लेवल जॉब्स में भी अनुभव की मांग बढ़ गई है, जिससे कॉलेज से निकलते ही नौकरी पाना कठिन हो गया है।
एआई के दौर में केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है। छात्रों को अब नई तकनीक जैसे डेटा एनालिटिक्स, मशीन लर्निंग और एआई टूल्स की समझ विकसित करनी होगी। जो छात्र इन स्किल्स को अपनाएंगे, उन्हें लिए अवसर खुले हुए है।
एक्सपर्ट के अनुसार, ज्यादातर कंपनियां अपने मुनाफे को बढ़ाने के लिए कम लोगों में ही ज्यादा काम लेना चाह रहे है। टैरिफ, वीजा जैसे कारणों से भी प्लेसमेंट पर असर हो रहा है। लेकिन यह मामला उतार-चढ़ाव वाला होता है। कभी इनके कारण प्लेसमेंट कम होती है तो कभी बढ़ भी जाती है।
ट्रिपलआईटी डायरेक्टर प्रो ओपी व्यास नवा रायपुर एआई क्रांति ने कार्य-भूमिकाओं को पुनर्परिभाषित किया है। इसका सीधा प्रभाव भर्ती प्रक्रियाओं पर दिख रहा है ट्रिपलआईटी आने वाली कंपनियां भी अपनी भर्ती रणनीतियों को उसी अनुसार परिवर्तित कर रही हैं।
कंपनियां अब पारंपरिक जॉब जैसे प्रोग्रामर, सॉफ्टवेयर इंजीनियर , कंसलटेंट आदि पर हायङ्क्षरग काफी काम कर रही है। वही कंपनियां अब ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता दे रही हैं, जो एआई-सक्षम, एआई आधारित दक्षता, डाटा साइंटिस्ट, बहु-कौशलयुक्त और नवाचार के लिए तैयार हों।